
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के मास्टर ऑफ रोस्टर पर सवाल उठाने वाली शांति भूषण की याचिका पर आज सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस की भूमिका को कठघरे में रखने वाली इस याचिका पर जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच सुनवाई करेगी। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में केसों का आवंटन चीफ जस्टिस अकेले नहीं बल्कि कॉलेजियम में शामिल सभी पांच जज करें। भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने चीफ जस्टिस की मनमानी के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस की थी। मसला पूरी तरह हल नहीं हुआ तो उन्होंने याचिका दायर की।
रोस्टर का मतलब मनमानी नहीं
याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण का कहना है कि संविधान में मास्टर ऑफ रोस्टर का मतलब मनमानी ऑफ रोस्टर कतई नहीं हो सकता है। हमारी याचिका भी रोस्टर की मास्टरशिप को स्पष्ट, पारदर्शी और नियमित करने के लिए है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने हमारी याचिका सिर्फ इसलिए स्वीकार नहीं की क्योंकि इसमें CJI को पक्षकार बनाया गया था। बड़ी मुश्किल से मसला हल हुआ तो ये समस्या आई कि आखिर चीफ जस्टिस के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देने वाले इस मुकदमे को हम उन्हीं की पीठ में कैसे ले जाएं।
चेलमेश्वर ने सुनवाई से कर दिया था इनकार
प्रशांत भूषण ने पहले याचिका पर सुनवाई के लिए जस्टिस चेलमेश्वर की कोर्ट में गुहार लगाई थी। जस्टिस चेलामेश्वर ने मामले की सुनवाई से ये कहते हुए इनकार किया कि वो नहीं चाहते कि 24 घंटे के भीतर पहले की तरह उनका आदेश उलट दिया जाए। इसके बाद प्रशांत भूषण ने इस मामले को चीफ जस्टिस की कोर्ट में मेंशन किया। चीफ जस्टिस ने बेंच में अपने साथी जस्टिस खानविलकर और जस्टिस चंद्रचूड़ से मशविरा किया। शाम को इस मामले को जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच को सुनवाई के लिए सौंप दिया।
4 जलों ने कामकाज के तरीकों पर उठाया था सवाल
आपको बता दें कि 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार सिटिंग जजों जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है। अगर ऐसा चलता रहा तो यह लोकतंत्रीय प्रक्रियाओं के लिहाज से ठीक नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी। हाल ही जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा था कि अगर CJI दीपक मिश्रा के बाद अगर जस्टिस रंजन गोगोई को CJI नहीं बनाया जाता है तो हमने जो बात कही थी वो सही साबित हो जाएगा। आपको बता दें कि जस्टिस चेलमेश्वर 22 जून को रिटायर हो रहे हैं तो वहीं दीपक मिश्रा अक्टूबर के महीने में रिटायर होंगे।
Updated on:
13 Apr 2018 08:37 am
Published on:
13 Apr 2018 08:33 am
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