इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपियों को कहा कि वे चैन से बांधे गए कुत्तों को तुरंत छोड़ें। कोर्ट ने पशु कल्याण बोर्ड को याद दिलाया कि वह उसके 2009 की याचिका के आदेश की पालना सुनिश्चित कराए। जिसमें उल्लेख किया गया है आवारा कुत्तों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए हर कॉलोनी में एक तय स्थान हो। इस स्थान का चयन आरडब्ल्यूए, स्थानीय पुलिस थानाधिकारी और पशु कल्याण बोर्ड का अधिकारी करें। इन तय स्थानों पर कुत्तों को कब खाना दिया जाएगा इसका समय भी सुनिश्चित किया जाए। मामले की अगली सुनवाई एक सितम्बर को होगी।