
Namaz
मुंबई। उत्तर प्रदेश के
दादरी कांड के बाद जहां देश मे सांप्रदायिक तनाव स्थिती पैदा हो गई, वहीं देश की
आर्थिक राजधानी मंुबई के धारावी इलाके में एक हिंदू व्यपारी ने नमाज के लिए देकर
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की है। मस्जिद में निर्माण का काम चल रहा है जिसके
चलते मुसलमानों को नमाज अदा करने में दिक्कतें आ रही थी।
लेकिन, 53 वर्षीय
इस चमड़े के व्यपारी की वजह से मुसलमानों को नमाज अता करने के लिए जगह मिल गई है।
मस्जिद के ट्रस्टी हाजी शौकत अली ने बताया कि हमारी मस्जिद बहुत ही छोटी और पुरानी
है जिसके चलते मार्च में हमने मरम्मत का काम शुरू हुआ था। समुदाय के लोग जब दिलीप
काले के पास मदद के लिए गए तो उन्होंने तुरंत खाली पड़ी अपनी दुकान नमाज अता करने
के लिए दे दी।
काले की दो दुकानें हैं जिनमें से एक ठीक मस्जिद के सामने
है। उन्होंने बताया कि वो लोग मेरे पास मदद के लिए आए थे और मेरे पास एक दुकान खाली
पड़ी थी, तो मैंने उन्हें दे दी। उन्होंने कहा कि आखिरकार, यह मेरे ही लोग है और हम
पिछले 40 सालों से इसी जगह पर एक साथ रह रहे हैं।
हालांकि, नमाज पढ़ने में
कोई दिक्कत नहीं हो, काले ने फर्श पर मार्बल डलवाए और साथ ही बिजली का कनेक्शन भी
करवा के दिया ताकि नमाजियों को कोई परेशानी नहीं हो। स्थानीय निवासी अत्तीउल्ला
चौधरी ने बताया कि दुकान का निर्माण हाल ही में हुआ था जिसके चलते फर्श का काम नहीं
हुआ था और नमाज पढ़ने में दिक्कतें आ रही थीं। यही देखते हुए उन्होंने फर्श पर
मार्बल डलवा दिए, पंखे और लाइट का कनेक्शन करवा दिए।
स्थानीय निवासियों ने
बताया कि काले ने दुकान का किराया लेने से भी मना कर दिया है। दुकान जिस इलाके में
स्थित है, वहां एक लाख रूपए प्रति माह किराया मिल सकता है, लेकिन काले हमसे किराए
के रूप में एक रूपया भी नहीं ले रहे हैं। निवासियों का कहना है कि हम लोग अप्रेल से
दुकान का इस्तेमाल नमाज पढ़ने के लिए कर रहे हैं और कुछ महीनों तक और इसका इस्तेमाल
करेंगे। तब तक मस्जिद का काम भी पूरा हो जाएगा।
काले ने बताया कि जबतक
मस्जिद का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक बिना कोई किराया दिए ये लोग दुकान का
इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता की मैंने कोई बड़ा काम किया
है। पैसों का मैं क्या करूंगा? मुझे कोई किराया नहीं चाहिए।
भाईचारे का
उदहारण
चौधरी ने कहा कि काले ने जो किया है, वह हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का सच्चा
उदहारण है। इन दिनों लोगों में एक-दूसरे के प्रति काफी गुस्सा है और छोटी से बात पर
दंगा हो सकता है। ऎसे समय में काले ने सा ंप्रदायिक सjाव की मिसाल पेश की है।
चौधरी ने कहा कि हम इसे गंगा जमुना तहजीब कहते हैं। जिस तरह से गंगा और
जमुना नदियां मिलती हैं, ठीक उसी तरह यहां पर शांति के लिए हिंदू और मुस्लिम
संस्कृतियां मिलती हैं।
Published on:
14 Oct 2015 10:40 pm
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