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लॉकडाउन में भूखे रहकर दिया बच्ची को जन्म, अब अपना दूध नहीं पिला पा रही बेबस मां

Lockdown के बीच भूख से बेबस मां New born बच्चे को नहीं पिला पा रही अपना दूध राजधानी दिल्ली की मामला

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भूख से बिलख रही बच्ची को लेकर छलका मां का दर्द

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस ( Coronavirus in india ) का असर अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। यही वजह है कि लॉकडाउन की अवधि को भी पीएम मोदी ( PM Modi ) ने 19 दिन बढ़ाकर 3 मई तक कर दिया है। कोरोना वायरस को मात देने के लिए भले ही लॉकडाउन ( Lockdown ) बड़ा हथियार बना है, लेकिन इस लॉकडाउन की वजह से कुछ परेशानियां भी सामने आई हैं।

लॉकडाउन की सबसे बड़ी मार प्रवासी गरीब ( Migrant worker ) और मजदूर वर्ग पर पड़ी है। जो कोरोना से तो बच रहे हैं लेकिन भूख इनके सामने यमदूतों की तरह मुंह बाहे खड़ी है। भूख और बेबसी के ऐसे ही हालातों से गुजर रही है एक मां। जो अपनी नवजात बच्ची को अपना दूध तक नहीं पिला पा रही।

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मामला राजधानी दिल्ली ( Delhi ) का है। जहां महक नाम की महिला ने लॉकडाउन के बीच बेटी को जन्म दिया है। न तो अस्पताल जाने के पैसे थे और न साधन, 22 वर्ष की महक और उनके पति गोपाल उत्तराखंड ( Uttarakhand ) के नैनीताल ( Nanital ) के एक गांव के रहने वाले हैं।

पुरानी दिल्ली के टाउनहॉल इलाके के भवन में मजदूरी करते हैं। लेकिन अब लॉकडाउन के चलते सबकुछ बंद है। ऐसे में इनके लिए दो वक्त की रोटी का बंदोबस्त करना मुश्किल हो गया है।

महक बताती हैं दो दिन में बस एक बार ही खाना नसीब होता है। बेटी को देख पिता गोपाल के आंसू नहीं रूकते हैं। महक कहती हैं 'बस एक मुट्ठी चावल खाया है, जब शरीर में कुछ जाएगा ही नहीं तो दूध कैसे आएगा, अब अपनी

नवजात बच्ची को दूध कैसे पिलाऊं?
महक जैसी और भी ना जाने कितनी मां होंगी कमोबेश इसी तरह की परेशानियों का सामना कर रही होंगी।
राहत देने वाली बात यह है कि अब दिल्ली सरकार ने महक की सुध ली है और उसके पास खाने की पर्याप्त चीजें पहुंचाई गई हैं।

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आम आदमी पार्टी के विधायक और प्रवक्ता दिलीप पांडे खुद परिवार के पास पहुंचे और महक और उनकी बेटी को जरूरी चिकित्सकीय सुविधाएं और राहत पहुंचाई है।

इसके साथ ही महक के साथ रहने वाले तकरीबन 30 परिवारों को दिल्ली सरकार राशन पहुंचा रही है।

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