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अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में देवास से केस हारा भारत,चुकाने होंगे 67 अरब

भारत इसरो के दो सैटेलाइट्स और स्पेक्ट्रम वाली डील निरस्त करने से जुड़ा केस हार गया है

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Sunil Sharma

Jul 26, 2016

ISRO

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हेग। भारत इसरो के दो सैटेलाइट्स और स्पेक्ट्रम वाली डील निरस्त करने से जुड़ा केस हार गया है। हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भारत के खिलाफ फैसला दिया है। केस कम्यूनिकेशन फर्म देवास मल्टीमीडिया ने दायर किया था। यह हार भारत के लिए बहुत बड़ा झटका है।

केस हारने के बाद भारत को करीब एक अरब डॉलर (67 अरब रुपए) बतौर नुकसान देवास मल्टीमीडिया को चुकाने पड़ सकते हैं। इतना ही नहीं,अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की नजर में देश की छवि खराब हो सकती है। 2005 में देवास मल्टीमीडिया और इंडियन स्पेस एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो)की कमर्शियल इकाई एंट्रिक्स के बीच डील हुई थी। डील के तहत एंट्रिक्स एस बैंड स्पेक्ट्रम में लंबी अवधि के दो सैटेलाइट्स ऑपरेट करने पर राजी हुआ।



इस डील से देवास को रिमोट एरिया में इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाएं डिलीवर करने में मदद मिलती। डील के तहत देवास मल्टीमीडिया 12 साल में एंट्रिक्स को 300 मिलियन यूएस डॉलर देती। इसरो ने एकतरफा कांट्रेक्ट निरस्त करते हुए कहा कि कमर्शियल उद्देश्य के लिए ट्रांसपांडर्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इनका इस्तेमाल केवल स्ट्रेट्जिक उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। खास बात यह है कि जब डील हुई तब इसरो के कई पूर्व वैज्ञानिक देवास के टॉप मैनेजमेंट में शामिल थे।


2011 में यूपीए सरकार ने डील को कैंसिल कर दिया था। यूपीए सरकार का कहना था कि उसे डील के बारे में जानकारी नहीं दी गई। साथ ही ऑक्शन प्रोसेस का पालन नहीं किया गया। 2015 में देवास ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय में भारत सरकार के खिलाफ मुकदमा कर दिया क्योंकि इसरो सरकार की ही संस्था है। लेकिन बाद में उसने डील कैंसिल कर दी। प्राधिकरण ने कहा कि डील कैंसल कर सरकार ने उचित नहीं किया जिससे देवास मल्टीमीडिया के निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ। मई 2016 में सीबीआई ने इस मामले में इसरो के पूर्व चेयरमैन जी.माधवन नायर से पूछताछ की थी।



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