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रूस से बोला भारत, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भागीदारी किसी देश के विरुद्ध नहीं

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने रूसी समकक्ष सरजेई लावरोव से हुई मुलाकात में भी यह बात रखी।

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रूस से बोला भारत, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भागीदारी किसी देश के विरुद्ध नहीं

अगले महीने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आएंगे। इससे पहले भारत ने कहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी भागीदारी किसी देश के विरुद्ध नहीं है। साथ ही कहा है कि वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने का इच्छुक है।

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एक मीडिया रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बड़ी भूमिका के लिए कोशिश कर रहा है। दूसरे देश इसे चीन के बढ़ते दखल को रोकने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भागीदारी का मुद्दा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके रूसी समकक्ष सरजेई लावरोव के बीच हुई बातचीत में भी उठा। रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम नरेंद्र मोदी के हिंद-प्रशांत के लिए ‘समग्रता के नजरिए’ को स्वीकारते हुए रूसी पक्ष ने महसूस किया कि ऐसे भी देश हो सकते हैं, जो अपने स्वार्थ के लिए हिंद-प्रशांत संकल्पना में ‘हेरफेर’ करने की कोशिश कर रहे हों।

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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी लावरोव से कहा कि भारत ने हमेशा जिम्मेदारी से काम किया है। वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सबको साथ लाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार- ‘विदेश मंत्री ने साफ किया कि भारत की भागीदारी किसी देश के विरुद्ध नहीं है।’

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गौर हो, पुतिन की अगले महीने होने वाली भारत यात्रा के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। जानकारों के अनुसार- इस दौरान पिछले साल नवंबर में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के लंबित चतुष्कोणीय गठबंधन को भी नई दिशा दी जा सकती है। इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख समुद्री मार्गों को प्रभावमुक्त रखने की रणनीति तैयार करना होगा।