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COP28 : भारत ने दुनिया को दिखाया पर्यावरण और अर्थव्यस्था के बीच तालमेल कैसे होता है

जलवायु सम्मेलन: पीएम ने 2028 में सीओपी33 की मेजबानी का रखा प्रस्ताव-पिछली सदी की गलती सुधारने के लिए ज्यादा समय नहीं है: मोदी-सिर्फ मेरा भला हो, ये सोच दुनिया को अंधेरे में ले जाएगी

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भारत ने दुनिया को दिखाया पर्यावरण और अर्थव्यस्था के बीच तालमेल कैसे होता है

पीएम ने 2028 में सीओपी33 की मेजबानी का रखा प्रस्ताव

दुबई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां सीओपी28 जलवायु सम्मेलन में कहा, भारत ने पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच बेहतरीन संतुलन बनाकर दुनिया के सामने विकास का एक मॉडल पेश किया है और राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान लक्ष्यों को प्राप्त करने की राह पर है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, पिछली सदी की गलतियों को सुधारने के लिए हमारे पास ज्यादा समय नहीं है। सिर्फ मेरा भला हो, ये सोच, दुनिया को एक अंधेरे की तरफ ले जाएगी। हम सभी को अपने दायित्व निभाने ही होंगे। पूरी दुनिया आज हमें देख रही है, इस धरती का भविष्य हमें देख रहा है। हमें सफल होना ही होगा। हमें निर्णायक होना होगा। इस दौरान उन्होंने वर्ष 2028 में होने वाले सीओपी33 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने का प्रस्ताव रखा। इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरस और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद भी मौजूद थे।

ग्रीन क्रेडिट्स पहल की शुरुआत
पीएम मोदी ने, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा, हम 2030 तक प्रति वर्ष 2 अरब टन कार्बन उत्सर्जन कम कर सकते हैं। मैं इस फोरम से एक और पर्यावरण के अनुकूल, प्रभावी एवं सकारात्मक पहल का आह्वान कर रहा हूं, ग्रीन के्रडिट्स इनीशिएटिव। यह जन भागीदारी से कार्बन सिंक बनाने का अभियान है। मैं उम्मीद करता हूं कि आप सब इससे जरूर जुड़ेंगे।

इसलिए भारत का दावा मजबूत
पीएम मोदी ने कहा, भारत में विश्व की 17 फीसदी आबादी होने के बावजूद, ग्लोबल कार्बन उत्सर्जन में हमारी हिस्सेदारी 4 फीसदी से भी कम है। भारत विश्व की उन कुछ अर्थव्यवस्थाओं में है, जो जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने की राह पर है। हमारा लक्ष्य 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता को 45 फीसदी घटाना तथा गैर जीवाश्मीय ईंधन का हिस्सा 50 फीसदी करना है। लिहाजा, 2028 में जलवायु सम्मेलन भारत की मेजबानी में हो।

संबोधन की खास बातें
-मानव जाति के एक छोटे हिस्से ने प्रकृति का अंधाधुंध दोहन किया। लेकिन इसकी कीमत पूरी मानवता को चुकानी पड़ रही है।
-हमें संकल्प लेना होगा कि हर देश अपने लिए जो जलवायु लक्ष्य तय कर रहा है, जो संकल्प कर रहा है, वो पूरा करके ही दिखाएगा।
-हमें वैश्विक कार्बन बजट में सभी विकासशील देशों को उचित शेयर देना होगा। हमें अधिक संतुलित होना होगा।
-हमें ये संकल्प लेना होगा कि अनुकूलन, शमन, जलवायु वित्तपोषण, प्रौद्योगिकी, हानि और क्षति इन सब पर संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ें।
-अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरे देशों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण करें। स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति शृंखला को सशक्त करें।"


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