100 सालों में पहली बार ब्रिटेन से आगे हुई भारत की अर्थव्यवस्था

100 सालों में पहली बार ब्रिटेन से आगे हुई भारत की अर्थव्यवस्था
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भारत की अर्थव्यस्था ने 100 सालों में पहली बार ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को भी पीछे छोड़ दिया है।

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यस्था ने 100 सालों में पहली बार ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को भी पीछे छोड़ दिया है। भारत अब जीडीपी के आधार पर दुनिया की छठीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। इस सूची में भारत से ऊपर अमरीका, चीन, जापान, जर्मनी और फ्रांस हैं।

इन कारणों से ब्रिटेन से आगे हुई भारत की इकोनोमी

ये अंतर इस साल भारत की तेज इकोनोमी ग्रोथ और ब्रिटेन के बे्रक्जिट से बाहर होने की वजह से आया है। आर्थिक रूप से ये साल भारत के बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है। फरवरी में भारत ने दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में चीन को पीछे छोड़ दिया था। अक्टूबर में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अनुमान लगाया था कि भविष्य में भी भारत इसी गति से आगे बढ़ेगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि 2017 में भारत की जीडीपी 7.6 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2017 में लगाई बड़ी छलांग

गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने कुछ ही दिनों पहले कहा था कि भारत की बड़ी आबादी भी इसका आधार हो सकता है मगर भारत के लिए ये एक बड़ी छलांग है। इतिहास में भारत पर राज करने वाले ब्रिटेन ने 2016 में 1.8 प्रतिशत ग्रोथ की है और 2017 में ब्रिटेन की ग्रोथ 1.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जून में ब्रिटेन ने यूरोपियन संघ से बाहर निकलने का फैसला किया। उसके बाद से ही ब्रिटेन की इकोनोमी और इसकी करेंसी देानों ही जूझ रही है।

पीएम मोदी के फैसलों से भी सुधरी भारतीय इकोनोमी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार भारत की इकोनोमी को ग्लोबल कमोडिटीज की कीमतों में मंदी आने और उम्मीद से कम मुद्रास्फीति होने का लाभ मिला। 2014 में भारतीय प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक बाजार सुधारों को प्रेरित किया। मोदी सरकार ने भारत में कुछ सुधारों के साथ ही कुछ परेशानी भरे फैसले भी लिए। भारत दुनिया का दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है। इसके बावजूद भी यहां सिर्फ 2 से 3 प्रतिशत लोग ही इनकम टैक्स देते हैं। भारत से कालेधन को खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद करने का बड़ा फैसला लिया। इस फैसले के बाद भारत में 86 प्रतिशत मुद्रा वापस बैंकों के पास आ गई। इस आदेश से भारतीय अर्थव्यवस्था को कुछ नुकसान जरूर पहुंच सकता है।
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