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ट्रैवलॉग- स्टीम एक्सप्रेस के जरिए पुराने जमाने में फिर से लेकर जाएगा आपको भारतीय रेलवे…

भारतीय रेलवे द्वारा दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन से रेवाड़ी स्टेशन तक स्टीम एक्सप्रेस चलाई जा रही है।

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मुझे ट्रैवल का शौक हैं इसलिए ट्रैवल से रिलेटिड अक्सर मैं कुछ न कुछ देखता, पढ़ता रहता हूं। उस दिन भी मैं ऐसे ही कुछ इंटरनेट पर सर्फिंग कर रहा था कि तभी मुझे एक एड पॉपअप हुआ। उस एड में लिखा था भारतीय रेलवे स्टीम एक्सप्रेस चला रही है। मैं हैरान रह गया कि स्टीम एक्सप्रेस इस जमाने में कैसे? क्योंकि जहां इन दिनों बुलेट ट्रेन की बात हो रही है। उस समय में स्टीम एक्सप्रेस यानि पुराने जमाने में चलने वाली भाप के इंजन वाली ट्रेन फिर से भारतीय रेलवे चला रहा है। मतलब हम जो स्कूलों में पढ़ा करते थे कि पहले के जमाने में भाप के इंजन वाली ट्रेन चलती थी। वह एक बार फिर से चलाई जा रही है। तुरंत मन बनाया कि मुझे इस ट्रेन में ट्रैवल करना है।
यह स्टीम एक्सप्रेस जिसका नाम फेरी क्वीन है। यह दिल्ली कैंट स्टेशन से रेवाड़ी जंक्शन के बीच चल रही है। भारतीय रेलवे ने इस स्टीम एक्सप्रेस को 14 अक्टूबर 2017 से 28 अप्रैल 2018 तक चलाया जाएगा। यह ट्रेन पूरी तरह से कोयले के द्वारा चलाई जाएगी। मैंने फटाफट भारतीय रेलवे की वेबसाइट आईआरसीटीसी पर लॉग इन किया और ट्रेन की सारी डिटेल्स ली। वेबसाइट पर सारी इंर्फोमेशन थी कि ट्रेन कब से कब तक चलेगी। किराया कितने का होगा। टाइमिंग क्या होगी। यानी वह बेसिक बातें जो ट्रेन में ट्रैवल करने से पहले जाननी जरूरी होती हैं।


वेबसाइट पर दिए फोन नंबर से पता चला कि आप स्टीम एक्सप्रेस की टिकट ऑनलाइन भी बुक करा सकते हैं या फिर डायरेक्ट ट्रेन में भी टिकट ले सकते हैं। टिकट के रेट थोड़ा ज्यादा थे क्योंकि 3240 रुपये में इंसान भारतीय रेलवे द्वारा देश के दूसरे कोने तक भी आसानी से पहुंच सकता है। लेकिन जब बात विरासत की आती है, तो इतना खर्च करना बनता है क्योंकि लाइफ में इस तरह के एक्सपीरियंस होना बेहद जरूरी होता है। खैर वेबसाइट पर ट्रेन की पूरी आइटेनरी लिखी थी कि ट्रेन सुबह 10.30 बजे दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन से चल देगी। वहीं 1 बजे यह ट्रेन रेवाड़ी पहुंचा देगी। इसके अलावा जो इस ट्रेन से वापिस दिल्ली भी आना चाहता है, उसके लिए यही ट्रेन शाम को रेवाड़ी से 4.15 बजे चलेगी और लगभग शाम 6.15 तक दिल्ली पहुंच जाएगी। हां वापसी में यह ट्रेन डीजल के इंजन के साथ ही आएगी।

ट्रेन की यात्रा-
खैर वो सुबह आ गई जब मैं दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर फेरी क्वीन यानी स्टीम एक्सप्रेस के सामने खड़ा था। ट्रेन को अभी चलने में तकरीबन 15 मिनट थे। ट्रेन में जब मैं घुसा तो देखा कि ट्रेन में किसी तरह की कोई भी गंदगी नहीं है। सीट बहुत ही अच्छी है। साज सजावट एक दम देखने लायक थी। ट्रेन में बैठकर ऐसा लग रहा था जैसे कोई रॉयल-सी, राजा महाराजा वाली फील आ रही हो। ट्रेन ठीक अपने तय समय 10.30 बजे चल दी। स्टीम एक्सप्रेस के इंजन ने जब पहली सीटी मारी तो, वह आवाज बिल्कुल वैसी थी जैसा मैंने टीवी में सुना था।
जब मुझे पता चला था कि स्टीम एक्सप्रेस नाम से कोई ट्रेन चल रही है, तो मेरे दिमाग में एक इमेज आई थी कि यह ट्रेन कोयले से चलेगी तो जाहिर है इसकी स्पीड भी काफी धीरे होगी। लेकिन जब मैं ट्रेन में बैठा और ट्रेन चल चुकी, तो उसकी स्पीड देखकर, मैंने यह महसूस किया 'मैं गलत था'। ट्रेन दिल्ली से रेवाड़ी तक के बीच में 2 बार रूकी। जब भी ट्रेन किसी भी स्टेशन पर रूकती, तो सब इस ट्रेन को देखकर इसके साथ फोटो लेने लगते। जब ट्रेन रेवाड़ी जैसे बड़े जंक्शन पर पहुंची तो लोगों की स्टेशन पर भीड़ देखने लायक थी। हर कोई ट्रेन को ऐसे देख रहा था जैसे उन्होंने कुछ अलग ही देख लिया हो। मैंने स्टेशन पर उतरकर लोगों से बातचीत भी की, लोगों ने कहा कि ऐसी ट्रेन उन्होंने पहली बार देखी है। वहीं एक तो मुझे ऐसा लड़का मिल गया जिसने सेल्फी वगैरह खीचने के चक्कर में अपनी ही ट्रेन को मिस कर दिया था।

रेवाड़ी स्टीम लोको म्यूजियम-
रेवाड़ी पहुंचने के बाद स्टेशन के बराबर में ही मौजूद 'रेवाड़ी स्टीम लोको म्यूजियम' में गया। उस म्यूजियम में जाकर मैंने देखा तो मैं हैरान ही रह गया। वहां 165 साल तक पुराने स्टीम लोकोमोटिव इंजन थे। जो आज भी चलते हैं। वहीं कुछ इंजन ऐसे हैं जिन्हें दोबारा रिपेयर किया जा रहा है ताकी उन्हें फिर से चलाया जा सके। इस रेवाड़ी स्टीम लोको म्यूजियम में 6 से ज्यादा पुराने लोकोमोटिव स्टीम इंजन थे। इनमें सबसे खूबसूरत और आर्कषित लुक अकबर और अंगद इंजनों की है। इस जगह को देखने के बाद मुझे याद आया कि यहां तो कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। जैसे अर्जुन कपूर और करीना कपूर की 'की एंड का', सलमान खान की 'सुल्तान', वहीं भाग मिल्खा भाग में भी यहां के स्टीम इंजन का इस्तेमाल किया जा चुका है। इसके अलावा यहां वीआर बॉक्स पहना कर एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जाती है जिसमें ट्रेन में समय-समय पर किस तरह से बदलाव हुए सबका पूरा ब्यौरा है।

दिल्ली वापसी
तकरीबन शाम के 4 बजे थे तभी हमारे साथ आए ट्रेन के कुछ ऑफिशियल्स ने हमें सूचना दी कि अब दिल्ली चलने का वक्त आ गया है। शाम 4.15 बजे हम रेवाड़ी स्टेशन पर दिल्ली आने के लिए खड़े थे। फेरी क्वीन यानी स्टीम एक्सप्रेस का पूरा सफर खत्म हो रहा था। आपको बता दूं कि रेवाड़ी भारत का वह जो जंक्शन है जिससे कई दिशाओं के लिए गाड़ियां जाती हैं। इसके अलावा इस तरह की स्टीम एक्सप्रेस पहले दिल्ली से अलवर के बीच कई समय से चलाई जा रही है।