
अनुच्छेद 35ए मामला: जम्मू कश्मीर में माहौल गर्म, खुफिया विभाग ने किया आगाह
नई दिल्ली। जम्मू एवं कश्मीर में अनुच्छेद 35 ए की संवैधानिकता के सवाल पर देश की सबसे बड़ी अदालत में अभी सुनवाई शुरू नहीं हो पाई है। हालांकि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई टल भी सकती है। राज्यपाल ने एनएन वोहरा की ओर से स्थानीय और पंचायत चुनावों का हवाला देते हुए सुनवाई टालने की अपील की गई है। इस बीच खुफिया विभाग ने खबरदार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 35 ए पर कोई 'विपरीत' फैसला देता है तो राज्य की पुलिस में ही 'विद्रोह' हो सकता है। आखिरी खुफिया विभाग ऐसी आगाह वाली बातें क्यों कह रहा है इसे भी समझने की जरूरत है। दरअसल संविधान के अनुच्छेद 35ए के तहत राज्य के नागरिकों को कई विशेष अधिकार प्राप्त है। इस मसले को लेकर देश में लंबे समय से बहस जारी है। इसके साथ ही धारा 370 पर भी विवाद है। जम्मू-कश्मीर पुलिस घाटी में फैले आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों के साथ मिलकर लड़ती है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 1990 से लेकर अब तक 1600 पुलिसकर्मियों की जान जा चुकी है। लेकिन अब पुलिस के अधिकारियों को चिंता है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 35A को रद्द कर दिया तो इसके क्या नतीजे हो सकते हैं।
क्या है अनुच्छेद 35 ए?
आर्टिकल 35 ए में जम्मू कश्मीर के बाशिंदों को कुछ विशेष अधिकार देता है। साथ ही यह अनुच्छेद राज्य के नीति निर्माताओं को राज्य के लिए कानून बनाने की पूरी आजादी देता है, जिसे कानूनी तौर पर चुनौती भी नहीं दी जा सकती। यह अनुच्छेद राज्य विधानसभा को जम्मू एवं कश्मीर में स्थाई निवास सहित अन्य विशिष्ट फैसलों का अधिकार देता है। अनुच्छेद 35 ए धारा 370 का हिस्सा है। 35 ए 14 मई 1954 में लागू हुआ। तब राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। उनके ही आदेश पर ही यह अनुच्छेद पारित हुआ था।
माहौल है गर्म
कश्मीर में इस मुद्दे को लेकर माहौल गर्म है। कई जगह प्रदर्शन हुए। आर्टिकल 35 ए के साथ छेड़छाड़ करने पर सड़कों पर उतरने की धमकी दी जा रही है। कश्मीर केंद्रित राजनीतिक, सामाजिक, अलगाववादी और व्यापार समूहों ने एक स्वर में केंद्र सरकार को गंभीर परिणाम की धमकी देते हुए 35ए के साथ छेड़छाड़ न करने की चेतावनी दी है। ऑल पार्टी हुरियत कांफ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने अपने कैडर से एक लंबे और प्रभावी आंदोलन के लिए लामबंद होने का आह्वान किया है। धारा 35-ए पर 5 और 6 अगस्त के प्रस्तावित बंद के आह्वान को दोहराते हुए मीरवाइज ने कहा कि सुनियोजित साजिश के तहत अदालत के जरिये जम्मू-कश्मीर और इसकी आवाम की विशिष्ट पहचान को समाप्त करने का प्रयास हो रहा है। धारा 35-ए हमारी पहचान है।
Published on:
05 Aug 2018 11:53 am
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