
बेंगलुरु: पूर्व विदेश मंत्री और अब भाजपा में शामिल हो चुके एसएम कृष्णा के दामाद वीजी सिद्धार्थ के ठिकानों पर आयकर छापे के दौरान 650 करोड़ की अघोषित आय उजागर हुई है। देश की सबसे बड़ी कॉफी चेन कैफे कॉफी डे (सीसीडी) के संचालक सिद्धार्थ के 25 से ज्यादा ठिकानों पर तीन दिन से चल रही आयकर विभाग की कार्रवाई रविवार को कार्रवाई समाप्त हुई। आयकर अधिकारियों का कहना है कि अघोषित संपत्तियों और निवेश के आंकड़े अभी बढ़ सकते हैं क्योंकि बरामद दस्तावेजों की अभी जांच की जानी है।
दो दर्जन से ज्यादा ठिकानों पर छापा
21 सितम्बर से शुरू हुई जांच के दौरान मुंबई, बेंगलूरु, हासन, चेन्नई, चिकमंगलूर सहित सहित दो दर्जन से ज्यादा ठिकानों पर कार्रवाई की गई। इस दौरान सिद्धार्थ के सीसीडी सहित पर्यटन और आईटी से जुड़े कई प्रतिष्ठानों की जांच की गई है। आयकर विभाग की कार्रवाई का मुख्य केंद्र बेंगलूरु का सीसीडी का मुख्यालय रहा। कर्नाटक में इस वर्ष आयकर की दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पूर्व कर्नाटक सरकार के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार पर आयकर विभाग की कार्रवाई हुई थी।
ऐसे खुला था मामला
बीती फरवरी में समाज परिवर्तन समुदाय नामक संगठन ने सिद्धार्थ पर आरोप लगाया था कि 1999 तक सिद्धार्थ की माली हालत ऐसी थी कि उनके चैक बाउंस हो जाते थे। जब से उनके ससुर कृष्णा कर्नाटक के सीएम बने तो सिद्धार्थ के दिन फिरते गए। इन आरोपों के बाद कृष्णा ने भाजपा का दामन थाम लिया। माना जा रहा था कि दामाद के हितों की रक्षा के लिए उन्होंने कदम उठाया है।
देश-दुनिया में फैला काम
सीसीडी के देशभर में 1640 से ज्यादा स्टोर, 31 हजार से ज्यादा वेंडिग मशीन और 12 हजार से ज्यादा कॉरपोरेट खाते हैं। पराग्वे, वियना और क्वालालंपुर में भी सीसीडी के आउटलेट हैं। 1996 में बेंगलूरु में एक आउटलेट से शुरुआत हुई थी। सिद्धार्थ के बारे कहा जाता है कि वह अपने संस्थान में एमबीए या इंजीनियरिंग की बड़ी डिग्री वालों की जगह कम पढ़े लिखे लोगों को मौका देता है।
इसी साल भाजपा में शामिल
कर्नाटक के पूर्व सीएम और पूर्व विदेश मंत्री कृष्णा इसी साल मार्च में कांग्रेस से 36 साल का रिश्ता तोड़ते हुए भाजपा में शामिल हो गए थे। राजनीति के दिग्गज कृष्णा मनमोहन सरकार से पूर्व इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की कैबिनेट में भी मंत्री रहे। 2004 से 2008 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे। दरअसल, कृष्णा का वोक्कालिगा समाज में खासा प्रभाव है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के चलते उनके बीजेपी में आने का रास्ता बना था।
कार्ल माक्र्स से प्रभावित
1979 में बेंगलुरू के सेंट एलॉयसिस कॉलेज से स्नातक के दौरान सिद्धार्थ कार्ल माक्र्स के विचारों से बहुत प्रभावित थे। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा था कि मैं माक्र्स के विचारों से बहुत प्रभावित था और कम्युनिष्ट नेता बनना चाहता था। सिद्धार्थ का परिवार कॉफी की खेती और इसके निर्यात के व्यवसाय से जुड़ा था। 1995 में सिद्धार्थ देश के सबसे बड़ा कॉफी निर्यातक बने।
Updated on:
25 Sept 2017 01:24 am
Published on:
24 Sept 2017 11:45 pm
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