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क्रांतिकारी संत के रूप में पहचाने जाते थे तरुण सागर महाराज, बयानों से बंटोरी थी सुर्खियां

जैन मुनि तरुण सागर का निधन, दोपहर ३ बजे होगा अंतिम संस्‍कार

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क्रांतिकारी संत के रूप में पहचाने जाते थे तरुण सागर महाराज, राजनीतिक हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। जैन मुनि तरुण सागर का शनिवार को निधन हो गया है। वह 51 वर्ष के थे। जैन मुनि पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और शनिवार सुबह करीब ३ बजे पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके में स्थित राधापुरी जैन मंदिर में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। जैन मुनि तरुण सागर का अंतिम संस्कार उत्तर प्रदेश के मुरादनगर में स्थित तरुणसागरम् में किया जाएगा। जैन मुनि तरुण सागर अपने बयानों को लेकर भी काफी चर्चा में रहे।

क्रांतिकारी संत के रूप में पहचान
धर्म के साथ-साथ जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने सामाजिक जीवन में भी खासा दखल रखते थे। खास तौर पर अपने बयानों के चलते वे काफी चर्चा में भी रहे। जैन मुनि ने देश की कई विधानसभाओं में प्रवचन दिया। हरियाणा विधानसभा में उनके प्रवचन पर काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद संगीतकार विशाल डडलानी के एक ट्वीट ने काफी बवाल खड़ा कर दिया था। मामला बढ़ता देख विशाल को माफी भी मांगनी पड़ गई थी। इस विवाद के बाद आम आदमी पार्टी से जुड़े संगीतकार डडलानी ने राजनीति से अपने आप को अलग कर लिया था। मुनिश्री अपने कड़वे प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध रहे। इसी वजह से उन्हें क्रांतिकारी संत भी कहा जाता था। वहीं, कड़वे प्रवचन नामक उनकी पुस्तक काफी प्रचलित है। समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करने में उन्‍होंने काफी प्रयास किए।

जनसंख्या नियंत्रण पर भी दिया सुझाव
जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने अपने प्रवचनों में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर भी सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि, दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर रोक लगनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने कड़ा कानून बनाने तक का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि देश में दो से ज्यादा बच्चे करने पर रोक लगनी चाहिए। इस मामले में कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। इसे सख्ती से लागू करने के लिए उन्होंने कानून तोड़ने वालों की तमाम सुविधाएं बंद करने का भी सुझाव दिया है।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दी श्रद्धांजलि
केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा है कि 'जैन मुनि श्रद्धेय तरुण सागर जी महाराज के असामयिक महासमाधि लेने के समाचार से मैं स्तब्ध हूं। वे प्रेरणा के स्त्रोत, दया के सागर एवं करुणा के आगार थे। भारतीय संत समाज के लिए उनका निर्वाण एक शून्य का निर्माण कर गया है। मैं मुनि महाराज के चरणों में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

मध्यप्रदेश में लिया जन्म
जैन मुनि तरुण सागर का जन्‍म मध्य प्रदेश के दमोह में 26 जून, 1967 को हुआ था। उनकी मां का नाम शांतिबाई और पिता का नाम प्रताप चंद्र था. तरुण सागर ने आठ मार्च, 1981 को घर छोड़ दिया था. इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ में दीक्षा ली।