जोरहाट जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय की महिला शिक्षका बंदिता बोराह को कानून के खिलाफ में प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं के समर्थन करने पर नौकरी से निकाल दिया गया ।
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (citizenship amendment act ) को लेकर असम समेत देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी बीच एक महिला टीचर को विरोध प्रदर्शन का समर्थन करना भारी पड़ गया। असम के जोरहाट जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय की महिला शिक्षका बंदिता बोराह को कानून के खिलाफ में प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं के समर्थन करने पर नौकरी से निकाल दिया गया । टीचर की नियुक्ति संविदा (कॉन्ट्रेक्ट) के आधार पर हुई थी। स्कूल प्रिंसिपल ने 24 दिसंबर को टीचर बंदिता बोराह की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया। बंदिता जवाहर नवोदय विद्यालय में फैकल्टी-सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर (FCSA) के पद पर तैनात थीं।
स्कूल की कार्रवाई से कोई फर्क नहीं पड़ता- टीचर
उधर महिला टीचर बंदिता बोराह ने अपने ऊपर हुई कार्रवाई को लेकर कहा कि वो इस आदेश की परवाह नहीं करतीं और असम के लोगों के साथ नए नागरिकता कानून का विरोध करती रहेंगी। बंदिता बोराह ने बताया कि 'कुछ छात्राएं राज्य में हो रहे एंटी-CAA प्रदर्शनों को देखकर बहुत भावुक थीं। उन्होंने स्कूल परिसर में प्रदर्शन भी किया। मेरी एक सहयोगी टीचर ने उनका मजाक उड़ाते हुए प्रदर्शन करने वाले असमी लोगों को अनपढ़ बताया। छात्राओं ने टीचर से माफी मांगने की मांग की। छात्राओं की इस मांग का मैंन समर्थन किया था और कहा था कि शिक्षिका को ऐसा नहीं कहना चाहिए। इसपर अगर मुझे टर्मिनेट किया जाता है। तो यह हैरान करने वाली बात है।
स्कूल प्रबंधन टीचर के जवाब से संतुष्ट नहीं
बंदिता बोराह के मुताबिक, उन्हें स्कूल की ओर से ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया गया। इसपर जवाब भी दिया गया। लेकिन 24 दिसंबर को स्कूल प्रशासन ने आदेश जारी कर मेरी सेवा समाप्त कर दिया। स्कूल प्रबंधन की दलील है कि बंदिता ने अपने पद का दुरुपयोग किया है और बंदिता के जवाब से प्रशासन संतुष्ट नहीं है । लिहाजा स्कूल की बेहतरी के लिए उनकी FCSA के नाते सेवाओं को समाप्त किया जाता है।