
नई दिल्ली। जस्टिस केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में प्रोन्नति पर पुनर्विचार का मामला न्यायपालिका और सरकार के बीच विवाद का विषय बन गया है। यही वजह है कि कोलेजियम की एक घंटे की बैठक के बावजूद इस मुद्दे पर फैसला आगे के लिए टाल दिया गया। अब इसमें एक मोड़ यह भी उभरकर आया है कि जस्टिस कुरियन जोसेफ की तरफ से मीडिया को दिया गया बयान भी केएम जोसेफ की नियुक्ति में नियुक्ति में बाधक साबित हो सकता है। सरकार ने जोसेफ की नियुक्ति को लेकर मीडिया में उनके पक्ष में जस्टिस कुरियन जोसेफ के बयान को अदालती गरिमा के खिलाफ माना है। इस बात को लेकर सरकार बैठक से पहले अपनी मंशा जाहिर कर चुकी है। इसके बावजूद कोलेजियम में शामिल सुप्रीम कोर्ट के जज चाहते हैं कि जोसेफ को प्रोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज नियुक्त किया जाए।
कुरियन जोसेफ ने क्या कहा था?
जस्टिस केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में प्रोन्नति को लेकर रविशंकर प्रसाद की चिट्ठी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट के पांच सीनियर जजों में से एक कुरियन जोसफ एक मीडिया हाउस को दिए बयान में कहा कि कोलेजियम अपनी सिफारिश दोबारा सरकार को भेजेगी और तथ्यों और आंकड़ों के हवाले से बताएगी कि कैसे सरकार ने उनकी नियुक्ति की सिफारिश को वापस करते हुए पिछली नजीरों को ध्यान में नहीं रखा है।
कानून मंत्रालय का जवाब
इसके अगले ही दिन उसी अखबार में कानून मंत्रालय के एक अनाम शीर्ष अधिकारी के नाम से सरकार की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई कि कोलेजियम की बैठक होने से पहले एक वरिष्ठ जज का इस तरह अपने मन की बात प्रेस को बताना परंपरा और नियमों के अनुरुप नहीं है। साथ ही बुधवार को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम को तय करना है कि कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को क्या जवाब दिया जाए, जिन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश पर दोबारा विचार करने को कहा है।
कानून मंत्री ने गिनाए तीन आधार
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों के समूह यानी कॉलेजियम ने जनवरी में इंदु मल्होत्रा और केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफरिश की थी। लंबे इंतजार के बाद कानून मंत्री ने इंदु मल्होत्रा के नाम की सिफारिश को मान लिया लेकिन जोसेफ के नाम पर दोबारा विचार करने को कहा। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने देश के चीफ जस्टिस और कॉलेजियम के प्रमुख दीपक मिश्रा को पत्र लिखकर तीन कारण बताए कि क्यों केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में जज नहीं बनाया जाना चाहिए। इनमें पहला ये कि केरल से एक जज पहले ही सुप्रीम कोर्ट में हैं जो राज्यों के प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के अनुरुप नहीं है। दूसरा जस्टिस जोसेफ वरीयता क्रम में देश में 42वें नंबर पर हैं जो काफी नीचे है। तीसरा कि सुप्रीम कोर्ट में अनुसूचित जाति या जनजाति का कोई जज नहीं है।
Published on:
03 May 2018 07:58 am
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