
कच्छी-सिंधी घोड़े को मिली भारत में सातवीं नस्ल के रूप में पहचान, जानें क्या है खासियत
करनाल। 'रेगिस्तानी घोड़े' के नाम से प्रसिद्ध प्रजाति को अब पंजीकृत किया गया है। कच्छी-सिंधी घोड़े की किस्म को पहचान मिल गई है। इस नस्ल को 4 अगस्त को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ब्रीड रजिस्ट्रेशन समिति ने रजिस्टर्ड किया है। हरियाणा के करनाल स्थित राष्ट्रीय पशु आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) के वैज्ञानिकों द्वारा इसे पंजीकृत कराया गया था।
क्या हैं रेगिस्तानी घोड़े की खासियतें?
कच्छी-सिंधी घोड़ों की संख्या करीब 4,000 है। इन घोड़ों की बनावट बेहद आकर्षक होती है। उनकी नाक रोमन जैसे और मुड़े हुए कान होते हैं, जोकि एक-दूसरे को छूते नहीं हैं। इनकी लम्बाई 56 से 60 इंच की होती है। वहीं, इनकी पीठ छोटी होती है। मीडियो रिपोर्ट के मुताबिक कच्छी-सिंधी घोड़े की खासियत ये है कि शुष्क और अर्द्धशुष्क मौसम में खुद को ढाल लेता है। साथ ही इस रेगिस्तानी घोड़े के भीत गर्मी को सहने की कुव्वत भी होती है। राष्ट्रीय पशु आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो ( NBAGR) के एक वैज्ञानिक ने जानकारी दी कि डीएनए रिपोर्ट और शारीरिक बनावट के आधार पर यह बात देखी गई है कि कच्छी-सिंधी घोड़ा मारवाड़ी और काठियावाड़ी के घोड़ों से बिल्कुल अलग है। वैज्ञानिक ने बताया, 'कच्छी-सिंधी ब्रीड रेगिस्तान का घोड़ा है। इसके अंदर रेगिस्तान में खुद को ढालने की क्षमता होती है। इसकी शारीरिक बनावट ऐसी है कि यह रेगिस्तान की गर्मी में खुद को जिंदा रख सकता है। इसकी नाक पर कवच होता है, जिससे इसकी सहनशक्ति बढ़ती है। इस नस्ल को अक्सर भारत का मस्टैंग (जंगली घोड़ा) कहा जाता है।' कच्छी-सिंधी घोड़ा गुजरात के कच्छ जिले और राजस्थान के जैसलमेर-बाड़मेर में पाया जाता है।
इन घोड़ों की नस्ल को मिल चुकी है पहचान
अभी तक भारत में आधिकारिक तौर पर मारवाड़ी, काठियावाड़ी, जंस्कारी, स्पीति, भूटिया और मणिपुरी के घोडों की नस्ल को पहचान मिल चुकी है। अब इस लिस्ट में कच्छी-सिंधी घोड़ा भी शामिल हो गया है। कच्छी-सिंधी घोड़े की नस्ल को भारत में घोड़ों की सातवीं प्रजाति के रूप में पहचान मिली है।
Published on:
27 Aug 2018 01:49 pm
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