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काशी नाथ सिंह ने भी लौटाया साहित्य अकादमी सम्मान

उन्होंने पुरस्कार के साथ मिली एक लाख रूपये की राशि को भी लौटाने का एलान किया है। काशीनाथ सिंह का उपन्यास काशी का अस्सी काफी लोकप्रिय हुआ था।

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Shakti Singh

Oct 17, 2015

kashinath singh

kashinath singh

वाराणसी।
जाने-माने हिंदी साहित्यकार डॉ. काशीनाथ सिंह ने भी अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार
लौटाने का एलान किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार क लबुर्गी हत्या कांड में
लेखकों के विरोध का मखौल उड़ा रही है और दादरी कांड में गैर जिम्मेदाराना रवैया
अपना रही है। अब तक 30 के लगभग साहित्यकार अपने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा चुके
हैं।

सिंह ने बताया कि कन्नड़ भाषा के जानेमाने लेखक एमएम कलबुर्गी की हत्या
के मामले में लेखकों के लगातार विरोध को सरकार गंभीरता से नहीं ले रही है और उल्टे
मखौल उड़ा रही है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के दादरी की घटना को भी सरकार गंभीरता
से नहीं ले रही है। इससे लगता है कि सरकार लगातार लोकतांत्रिक मूल्यों क ो नजरअंदाज
कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुलतावादी देश के लिए किसी भी सरकार का ऎसा
व्यवहार उचित नहीं कहा जा सकता है। देश को एक रंग में रंगने की कोशिश बेहद खतरनाक
साबित हो सकती है।




उन्होंने कहा कि कलबुर्गी हत्या मामले में लेखकों द्वारा
विरोध स्वरूप साहित्य आकादमी पुरस्कार लौटाना शुरू किया तो उन्हें लगा कि सरकार इस
मामले को गंभीरता से लेगी, लेकिन वह चुप रही और जब बोली तो लेखकों का अपमान किया
गया। उन्होंने कहा कि सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने लेखकों को राजनीति के चश्मे से
देखा, जिससे उन्हें काफी आघात पहुंचा। डॉ. सिंह ने कहा कि लेखक किसी पार्टी विशेष
का नहीं होता, वह तो आम जनता का होता है। उसके बारे में राजनीति करना बेहद चिंताचनक
है।



उन्होंने पुरस्कार के साथ मिली एक लाख रूपये की राशि को भी लौटाने का एलान किया है।
काशीनाथ सिंह बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रह चुके हैं और उनका उपन्यास
काशी का अस्सी काफी लोकप्रिय हुआ था।

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