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तलाक के मामले में केरल ने यूपी-बिहार को पीछे छोड़ा

देशभर के करीब 19 राज्यों के कुल लंबित मामलों से भी ज्यादा घरेलू विवाद के मामले केरल में अटके हुए हैं।

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Sweta Pachori

Jan 08, 2017

divorce cases

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नई दिल्ली। शादी से जुड़े सबसे ज्यादा विवाद केरल के फैमिली कोर्ट में दर्ज हैं। न्याय विभाग की ओर से जुटाए गए आंकडों के अनुसार नंवबर 2016 तक केरल में वैवाहिक विवादों से जुड़े हुए 52,000 मामलें अधूरे हैं। हालांकि कोर्ट ने 2015 में शादी से जुड़े 50 हजार विवादों का निपटारा किया था। मगर इसके बावजूद भी केरल में घरेलू कलह के मामले बढ़ते जा रहा है।

केरल ने तलाक के अधूरे मामलों में 19 राज्यों को छोड़ा पीछे

देशभर के करीब 19 राज्यों के कुल लंबित मामलों से भी ज्यादा घरेलू विवाद के मामले केरल में अटके हुए हैं। केरल की जनसंख्या पूरे देशभर की कुल जनसंख्या का 3 प्रतिशत भी नहीं है। इसके बावजूद भी इस राज्य में यूपी, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तेेलांगना और उड़ीसा जैसे राज्यों से ज्यादा पारिवारिक विवाद के मामले लंबित हैं। आंकडों के अनुसार केरल के 28 फैमिली कोर्ट में 2013 में 43,914 केस और 2015 में 51,288 केस का निपटारा हुआ। इसके बाद भी ताजा आंकडों के अनुसार 2016 में करीब 52,446 केसेज पेंडिंग हैं। तलाक के मामले देखने वाले फैमिली कोर्ट गुजारा भत्ता, तलाक के बाद बच्चों की कस्टडी जैसे फैसले भी सुनाते हैं। इन कोर्ट को झगड़े का निपटारा करने के लिए एक कुशल और शीघ्र तंत्र की पेशकश करनी होती है।

केरल से पहले नंबर एक पर था तमिलनाडु, अब पहुंचा 5वें स्थान पर

केरल से पहले तमिलनाडु में तलाक के सबसे ज्यादा मामले लंबित थे। 2013 और 2014 में तमिलनाडु इन मामलों में सबसे ज्यादा आगे था। वहीं 2016 में तमिलनाडु 37,618 केसेज के साथ पांचवे स्थान पर पहुंच गया है। तमिलनाड़ ने 2013 से 2015 के बीच करीब 40,000 वैवाहिक विवाद के मामलों का निपटारा किया। बिहार जिसकी जनसंख्या केरल से करीब तीन गुना ज्यादा है और दोगुना क्षेत्रफल है वो इस सूची में दूसरे स्थान पर है। बिहार के फैमिली कोर्ट में तलाक के 50,847 मामले अभी विचाराधीन हैं। हालांकि बिहार के फैमिली कोर्ट इन मामलों का निपटारा करने में केरल से भी कहीं ज्यादा सुस्त हैं। बिहार में करीब 39 फैमिली कोर्ट हैं। बावजूद इसके 2013 में यहां सिर्फ 12,717 केस, 2014 में 13,506 केसे और 2015 में 13,756 केसेज सुलझाए गए।

मध्यप्रदेश तीसरें स्थान पर, यूपी में सबसे ज्यादा सुलझे मामले

मध्यप्रदेश तलाक के लंबित मामलों में तीसरे स्थान पर हैं। मध्यप्रदेश के फैमिली कोर्ट में करीब 46,866 मामले पेंडिंग हैं। मध्यप्रदेश के बाद महाराष्ट्र चौथे स्थान पर हैं। यहां करीब 45,690 मामले अभी अधूरे हैं। केरल की तुलना में करीब सात गुना ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश के 76 फैमिली कोर्ट में सिर्फ 5,466 मामले ही अभी बाकी हैं। यूपी में सबसे ज्यादा फैमिली कोर्ट हैं और यहां पिछले तीन सालों में करीब 2 लाख मामलों का निपटारा हुआ। 2015 में अकेले ही घरेलू कलह से जुड़े 1.19 मामले निपटाए गए। इस सूची में कर्नाटका छठें, उड़ीसा सातवें, हरियाणा आठवें, राजस्थान नौवें और झारखंड दसवें स्थान पर है। दिल्ली के फैमिली कोर्ट में करीब 11,862 मामले लंबित हैं। दिल्ली में 2013-15 के बीच हर साल करीब 12 हजार केसों का निपटारा किया गया।

तलाक के मामले

राज्य फैमिली कोर्ट लंबित मामले

केरल 28 52,446
बिहार 39 50,847
मध्यप्रदेश 50 46,866
महाराष्ट्र 25 45,690
तमिलनाडु 20 37,618

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