देशभर के करीब 19 राज्यों के कुल लंबित मामलों से भी ज्यादा घरेलू विवाद के मामले केरल में अटके हुए हैं। केरल की जनसंख्या पूरे देशभर की कुल जनसंख्या का 3 प्रतिशत भी नहीं है। इसके बावजूद भी इस राज्य में यूपी, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तेेलांगना और उड़ीसा जैसे राज्यों से ज्यादा पारिवारिक विवाद के मामले लंबित हैं। आंकडों के अनुसार केरल के 28 फैमिली कोर्ट में 2013 में 43,914 केस और 2015 में 51,288 केस का निपटारा हुआ। इसके बाद भी ताजा आंकडों के अनुसार 2016 में करीब 52,446 केसेज पेंडिंग हैं। तलाक के मामले देखने वाले फैमिली कोर्ट गुजारा भत्ता, तलाक के बाद बच्चों की कस्टडी जैसे फैसले भी सुनाते हैं। इन कोर्ट को झगड़े का निपटारा करने के लिए एक कुशल और शीघ्र तंत्र की पेशकश करनी होती है।