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नई दिल्ली। केरल 'लव जेहाद' मामले में राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने की जरूरत नहीं है। केरल सरकार के मुताबिक, राज्य पुलिस ने इस मामले में सही तरीके से जांच कर ली है और उसे इस मामले में ऐसा कुछ नहीं मिला है, जिसके लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराई जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
दाखिल हलफनामे में केरल सरकार ने कहा है केरल पुलिस को अभी तक की जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला है, जिसकी जानकारी केंद्र सरकार को दी जाए।
गौरतलब है कि इस मामले में राज्य सरकार की विशेष जांच टीम (एसआईटी) जांच कर रही है। हलफनामे में कहा गया है कि केरल पुलिस इस तरह के मामलों की जांच करने में पूरी तरह से सक्षम है। राज्य सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पास किए गए आदेश के मुताबिक इस मामले को जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा जा चुका है, लेकिन इस मामले की एनआईए से जांच कराए जाने की जरूरत नहीं है।
क्या है मामला
केरल में एक हिंदू महिला के इस्लाम अपनाने के बाद मुस्लिम लड़के से शादी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को रिपोर्ट जमा करने का आदेश दे रखा है। धर्म परिवर्तन कर निकाह करने वाली हदिया उर्फ अखिला के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उसके पिता, केरल सरकार और एनआईए को नोटिस जारी किया था।
केरल हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले को 'लव जेहाद' का मामला बताते हुए शादी रद्द करने का आदेश देते हुए महिला को उसके पिता के पास भेज दिया था। महिला के पति ने केरल हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हदिया के पति शफीन का कहना है हदिया की उम्र 24 साल है और उसने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन कर शादी की है और कोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता।
Published on:
07 Oct 2017 07:15 pm
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