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जानिए, वरिष्‍ठ पत्रकार कुलदीप नैयर के बारे में 10 बड़ी बातें

पूर्व पीएम इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगाने के निर्णय का उन्‍होंने खुलकर विरोध किया था।

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Dhirendra Kumar Mishra

Aug 23, 2018

नई दिल्ली। अपने लेखन के लिए दुनिया भर में चर्चित रहे वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे। कुलदीप नैयर कई दशकों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय थे। उन्होंने कई किताबें भी लिखी थीं। इस उम्र में भी वो सक्रिय थे। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थे और आईसीयू में भर्ती थी। अपने जीवन में उन्‍होंने कई उपलब्धियां हासिल की, जिन्‍हें बहुत कम लोग जानते हैं।

नैयर के जीवन से जुड़ी 10 बड़ी बातें:

1. कुलदीप नैयर का जन्‍म 14 अगस्‍त, 1924 में सियालकोट में हुआ था। कुलदीप नैयर ने लॉ की डिग्री लाहौर में ली थी। उन्होंने यूएसए से पत्रकारिता की डिग्री ली और दर्शनशास्‍त्र से पीएचडी की।

2. कुलदीप नैयर ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत बतौर उर्दू प्रेस रिपोर्टर की थी। वह दिल्ली के समाचार पत्र द स्टेट्समैन के संपादक रहे।

3. उन्होंने भारत सरकार के प्रेस सूचना अधिकारी के पद पर कई सालों तक काम किया। वह 25 सालों तक द टाइम्‍स लंदन के संवाददाता भी रहे। वह शांति और मानवाधिकारों को लेकर अपने रुख के लिए कारण जाने जाते हैं।

4. पत्रकारिता के अलावा वह बतौर एक्टिविस्ट भी सक्रिय रहे। आपातकाल के दौरान कुलदीप नैयर को भी गिरफ्तार किया गया था। उन्‍होंने इंदिरा के इस कदम का खुलकर विरोध किया था।

5. 1996 में संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे। 1990 में उन्हें ग्रेट ब्रिटेन में उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। अगस्त 1997 में राज्यसभा में नामांकित किया गया था।

6. वह डेक्कन हेराल्ड (बेंगलुरु), द डेली स्टार, द संडे गार्जियन, द न्यूज, द स्टेट्समैन, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून पाकिस्तान, डॉन पाकिस्तान, प्रभासाक्षी सहित 80 से अधिक समाचार पत्रों के लिए 14 भाषाओं में कॉलम और ऑप-एड लिखते थे।

7. उन्‍होंने बिटवीन द लाइन्स, डिस्टेंट नेवर : ए टेल ऑफ द सब कॉंटीनेंट, इंडिया आफ्टर नेहरू, वाल एट वाघा, इंडिया पाकिस्तान रिलेशनशिप, इंडिया हाउस, स्कूप, द डे लुक्स ओल्ड जैसी चर्चित किताबें लिखी थीं।

8. 1985 से उनके द्वारा लिखे गए सिंडिकेट कॉलम विश्व के अस्सी से ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं।
9. कुलदीप नैयर पर छद्म धर्मनिपेक्ष होने के साथ हिंदू विरोधी होने का भी आरोप समय समय पर लगा। एक बार उन्‍होंने पूर्व पीएम वाजपेयी को कानून बनाना चाहिए जो किसी राष्ट्रीय स्वयं सेवक को उच्च पद के लिए अयोग्य बनाए।

10. अपने एक लेख में लिखा था कि अन्ना हजारे इस आन्दोलन को अनशन से अलग रखते तो अच्छा होता और इसका ठीकरा उन्होंने टीम अन्ना के सदस्यों पर फोड़ा। उन्होंने कहा कि ये लोग ध्यान खींचने के लिए इस नाटकीय कदम को उठाना चाहते थे।


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