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कुमार पंकज
नई दिल्ली। जाने-माने वकील, राज्यसभा के सदस्य और देश के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रहे केटीएस तुलसी ने सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की ओर से उठाए गए सवाल को सही ठहराया है। तुलसी ने कहा कि जजों की कमी और सामुहिकता के अभाव से ये जज असंतुष्ट थे। इसलिए उन्होंने मीडिया के सामने अपनी बात रखी है।
तुलसी ने कहा कि आज जजों की कमी है और मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में जज जब अपनी मांग रखते हैं तो उनकी सुनवाई नहीं होती। इसलिए वे सार्वजनिक तौर पर बोलने के लिए मजबूर हुए। पत्रिका से विशेष बातचीत में तुलसी ने कहा कि जब संविधान खतरे में है तो निश्चित तौर पर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि सवाल उठाने वाले जजों को चिंता है कि कैसे लोकतंत्र कायम रहेगा। चार जजों ने जो पत्र जारी किया है उसके बारे में पूछे जाने पर तुलसी ने कहा कि पत्र में कुछ ज्यूडिशल आर्डर की बात है।
तुलसी ने कहा कि हो सकता है कि मुख्य न्यायाधीश भी खुलकर मीडिया के सामने आते लेकिन शायद वे इसलिए नहीं आए कि वे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। तुलसी ने कहा कि कोलेजियम को लेकर सरकार गंभीर नहीं होती है। कई बार कोलेजियम सरकार को एजेंडा भेजती है लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। इसलिए भी यह सवाल खड़ा होता है कि सरकार न्यायिक प्रक्रिया को लेकर क्या रूख अपना रही है।
जजो की नियुक्ति तुरंत हो
तुलसी ने कहा कि हताशा का जो भाव पैदा हुआ है उसे देखते हुए सरकार को जजों के खाली पड़े पदों को तुरंत भरना चाहिए। साथ ही मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर तय किया जाना चाहिए। इसमें जितना विलंब होगा उससे लोकतंत्र खतरे में है।
क्या है मामला
न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जज एक साथ मीडिया के सामने आए और उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है। इन जजों ने कहा कि अगर ऐसे ही रहा तो लोकतंत्र पर खतरा बढ़ता जाएगा।
Published on:
12 Jan 2018 03:47 pm
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