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Law Alumni का सामाजिक सरोकार, प्रवासी मजदूरों को मुंबई से रांची फ्लाइट से भेज पेश की मिसाल

NLS Alumni ने सक्षम लोगों को मैसेज दिया कि संकट के दौर में आप प्रवासी मजदूरों के लिए जो कुछ कर सकते हैं, करिए। प्रवासी मजदूरों को फ्लाइट से रांची भेज उनकी जिंदगी के इस पल को हमेशा के लिए यादगार बना दिया। एनएलएस के एलुमिनाई ने आधे दिन के समय में 11 लाख रुपए इकट्ठा कर इस काम को अंजाम दिया।

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नेशनल लॉ स्कूल बेंगलूरु के छात्रों ने प्रवासी मजदूरों की तकलीफों को देखते हुए फ्लाइट से घर भेजने का फैसला लिया।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस ( Coronavirus Crisis) संकट के इस दौर में बेंगलूरु नेशनल लॉ स्कूल ( NLS ) के एलुमनाई ( Alumni ) ने सामाजिक सरोकार का अच्छा उदाहरण पेश कर सबको चौंका दिया है। दरअसल, एनएलएस के छात्रों ने झारखंड के 180 प्रवासी मजदूरों ( Migrant Laborer’s ) को मुंबई से रांची एयर एशिया के फ्लाइट से भेजकर मानव सेवा का मिसाल पेश की है।

साथ ही सक्षम लोगों को इस बात का मैसेज भी दिया कि संकट के इस दौर में आप प्रवासी मजदूरों के लिए जो कुछ कर सकते हैं करिए। दूसरों को इंतजार मत कीजिए।

एनएलएस ( NLS ) के छात्रों ने खुद भी वही काम किया जो वो कर सकते थे। उन्होंंने खुद से फंड इकट्ठा कर इस काम को अंजाम दिया और ग्रुप के खर्चे पर मजदूरों को फ्लाइट से वापस घर भेजा। लॉ एलुमनाई का यह काम अपने आप में अलहदा है।

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अलहदा इस मायने में कि प्रवासी मजदूरों को उन्होंने फ्लाइट से भेजकर न केवल तकलीफ में सहायता की बल्कि बस के किराए के बराबर खर्च में एयर एशिया के फ्लाइट ( Air Asia Flights ) से रांची भेज उनकी जिंदगी के इस पल को हमेशा के लिए यादगार बना दिया।

नेशनल लॉ स्कूल बेंगलूरु के छात्रों ने प्रवासी मजदूरों को घर वापसी में हो रही तकलीफों को देखते हुए यह फैसला किया। मजदूरों को विमान से घर वापस भेजने के काम को साथ आए एलुमिनाई ने आधे दिन के समय में पर्याप्त फंड ( Efficient Fund ) इकट्ठा कर अंजाम दिया।

मजदूरों की बेहतरी के लिए झारखंड के सीएम की बात

एनएलएस के एक एलुमिनाई ने अपनी पहचान छिपाने की शर्त पर बताया कि झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ( Jharkhan Cm Hemant Soren ) ने इस बात का भरोसा दिया है कि मजदूरों के रांची पहुंचने पर उनका ख्याल रखा जाएगा। इतना ही नहीं नेशनल लॉ स्कूल के पिछले कई बैचों के पूर्व स्टूडेंट्स ने फंड इकट्ठा किया। विभिन्न एनजीओ के माध्यम से मजदूरों की पहचान की गई।

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विमान का किराया बस के बराबर

एनएलएस 2000 बैच की छात्र रह चुकी शाएल त्रेहान ने बताया कि उनके बैचमेट्स प्रवासी मजदूरों की सहायता को लेकर चर्चा कर रहे थे। पहले मजदूरों को मुंबई से रांची ले जाने के लिए बस का आइडिया आया लेकिन काउंट करने पर यात्रा का पूरा खर्चा विमान के बराबर ही आया। फिलहाल टाटा ग्रुप के साथ लीगल हेड के तौर पर काम कर रहे शुवा मंडल ने फ्लाइट का ऑप्शन सामने रखा।

त्रेहान ने बताया कि यह पूरा आइडिया संयुक्त प्रयासों का नतीजा है। इसमें टाटा ग्रुप, एयरलाइन और आईआईटी बॉम्बे में रिसर्च स्कॉलर प्रिया शर्मा ने भी मदद की। उन्होंने 180 यात्रियों की क्षमता वाले एयर एशिया के फ्लाइट को किराए पर लिया। पूर्व छात्रों ने क्राउड फंडिंग के जरिए 11 लाख रुपए जुटाए।

एक अन्य एलुमनाई ने बताया कि लॉकडाउन ( Lockdown ) पीरियड में कई सारे एलुमिनाई विभिन्न राज्यों में राहत कार्य में जुटे हुए हैं। प्रवासी मजदूरों की वापसी एक बड़ा मुद्दा रही। बस से वापस जाने और फ्लाइट का किराया लगभग बराबर ही पड़ा। इसलिए सोमवार से फ्लाइट शुरू होने पर उन्हें फ्लाइट से ही वापस भेजने का फैसला हमने किया।

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