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Lockdown: बेरोजगार होने पर 400 किमी रिक्शा चलाकर पहुंचे गांव, बोले- शुक्र है अभी तक सही सलामत हैं

पूरा देश इस वक्त कोरोना वायरस ( Coronavirus ) के संकट से जूझ रहा है। इसके संक्रमण ( COVID-19 ) को रोकने के लिए लॉकडाउन ( Coronavirus Lockdown ) लागू किया गया है। इस लॉकडाउन ( Lockdown in India ) की मार सबसे ज्यादा उन गरीबों, असहाय लोगों पर पड़ी है, जो अपना घरबार छोड़ कर रोजगार के लिए शहर गए थे। लॉकडाउन के चलते ऐसे लोगों पर रोजगार का बड़ा संकट खड़ा है। मध्यप्रदेश का रहने वाला मजदूर अपने परिवार को लेकर नोएडा से रिक्शा चलाकर 400 किलोमीटर दूर अपने गांव झांसी पहुंचा।

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migrant labourer rides 400 km on rickshaw

नई दिल्ली।
पूरा देश इस वक्त कोरोना वायरस ( coronavirus ) के संकट से जूझ रहा है। इसके संक्रमण ( COVID-19 ) को रोकने के लिए लॉकडाउन ( Coronavirus Lockdown ) लागू किया गया है। इस लॉकडाउन ( Lockdown in India ) की मार सबसे ज्यादा उन गरीबों, असहाय लोगों पर पड़ी है, जो अपना घरबार छोड़ कर रोजगार के लिए शहर गए थे। लॉकडाउन के चलते ऐसे लोगों पर रोजगार का बड़ा संकट खड़ा है। हालांकि, सरकार ऐसे जरूरतमंदों के लिए कई कदम उठा रही है। मध्यप्रदेश का रहने वाला मजदूर अपने परिवार को लेकर नोएडा से रिक्शा चलाकर 400 किलोमीटर दूर अपने गांव झांसी पहुंचा।

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पति-पत्नी दोनों हो गए बेरोजगार
बृजकिशोर ने बताया कि गांव में कर्ज बढ़ता गया तो वह अपनी पत्नी के साथ 2 साल पहले नोएडा आ गया था। काफी तलाश के बाद भी जब कोई काम नहीं मिला तो रिक्शा चलाने लगा। पत्नी घरों में झाड़ू-पोंछा करने लगीं। रोजाना जो भी कमाई होती उसी से गुजारा होता। लेकिन, अब कोरोना और लॉकडाउन के चलते बृजकिशोर और उसकी पत्नी दोनों बेरोजगार हो गए। उसने बताया कि लॉकडाउन के बाद जब पत्नी घरों में झाड़ू-पोंछा लगाने जाती थी तो मकान मालिक ऐसी नजरों से देखता जैसे वो ही कोरोना की मरीज हों। बाद में उसे काम पर आने से मना कर दिया।

लगातार 4 दिन चलाया रिक्शा
बुजकिशोर की पत्नी माया ने बताया कि उसके पति 4 दिन से लगातार रिक्शा चला रहे हैं। हम 4 रातें बिता चुके हैं। रात के समय डर लगता है। भगवान की कृपा से हम अभी तक सही सलामत हैं। रास्ते में कुद मददगार लोगों ने थोड़ा बहुत खाने—पीने के लिए भी दिया।


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