Corona मरीज के संपर्क में आने वालों को लेकर सरकार सख्त, हो जाएं क्वारंटीन वरना होगी जेल

  • Coronavirus के बढ़ते मामलों के चलते सख्त उद्धव सरकार
  • होम क्वारंटाइन और सील बिल्डिंग का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
  • मुंबई समेत प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे नए मामले

नई दिल्ली। देशभर में जारी कोरोना वैक्सीनेशन ( Corona Vaccination ) के बीच एक बार फिर कोरोना वायरस महामारी का खतरा बढ़ने लगा है। खास तौर पर महाराष्ट्र में कोविड-19 ( Coronavirus in Maharashtra ) के नए मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। यही वजह है कि अब महाराष्ट्र की उद्धव सरकार कोरोना को लेकर काफी सख्त नजर आ रही है।

कोविड-19 से हालात चिंताजनक होने के कारण, अधिकारियों ने कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें होम क्वारंटाइन और सील बिल्डिंग का उल्लंघन करने वालों को सजा दी जा सकती है।

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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में संक्रमण के कारण 736 ताजा मामले और तीन मौतें दर्ज की गईं। यह 6 जनवरी (795 नए मामलों) के बाद से शहर में देखे जाने वाले दैनिक मामलों की सबसे अधिक संख्या है।

मुंबई का कुल मामलों की संख्या 3 लाख 16,487 हो चुकी है जबकि 11,432 लोग अब तक इस बीमारी से मर चुके हैं। शहर का सक्रिय मामले 4,782 हैं।

इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए है। नए निर्देश के मुताबिक कोरोना मरीज के संपर्क में आने वालों को खुद ही क्वारंटीन होना होगा। यदि ऐसा नहीं पाया जाता है तो संपर्क में आने वाले पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसके तहत संबंधित व्यक्ति को जेल भी हो सकती है।

बीएमसी का निर्देश
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने होम क्वारंटाइन के नियम तोड़ने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और फिर उन्हें महामारी संबंधी रोग अधिनियम, 1897 के तहत अनिवार्य इंस्टीट्यूश्नल क्वारंटाइन के लिए भेजने का फैसला किया है।

भुगतना होगी ये सजा
कोविड-19 पॉजिटिव लोगों के हाई रिस्क वाले कॉन्टेक्ट यदि होम क्वारंटाइन नहीं होते हैं तो उनको मुंबई में छह महीने की कैद, या कम से कम 200 रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है।

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आपको बता दें कि कोरोना ने दुनियाभर में जमकर आतंक मचाया। ऐसे में हर दवा उम्मीद बंधा रही है। भारत की बात करें तो 29 जनवरी तक देश में लोगों को टीके की खुराकें देने के मामले में भारत पांचवें स्थान पर है।

मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक 31 राज्यों और केन्द्र शासित क्षेत्रों में उपचाराधीन मामलों की संख्या 5000 से कम है।

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धीरज शर्मा
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