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मार्शल अर्जन सिंह: देश के ऐसे वीर जिनकी वजह से कभी नहीं हारी भारतीय वायुसेना

दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में मार्शल अर्जन सिंह ने अंतिम सांस ली।
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नई दिल्ली

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ashutosh tiwari

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Updated: 16 Sep 2017, 9:37 PM IST

Marshal Of Indian Air Force Arjan Singh Real hro of india

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह ने शनिवार रात दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। उन्हें हार्ट अटैक के बाद शनिवार सुबह अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। पीएम मोदी और रक्षा मंत्री निर्मल सीमारमण भी इनका हाल जानने अस्पताल पहुंची थी। आइए आपको बताते हैं कि कौन है मार्शल अर्जन सिंह...

पाकिस्तान में हुआ था जन्म
मार्शल अर्चन सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1919 को फैसलाबाद पाकिस्तान में हुआ था। 19 साल की ही उम्र में उन्होंने पायलट ट्रेनिंग कोर्स पूरा कर लिया था। इसके बाद उन्होंने 1944 में अराकन ऑपरेशन और इमफाल ऑपरेशन में स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और ब्रिटिश शासन को जीत दिलाई। उनके कुशल नेतृत्व को देखते हुए उन्हें विशिष्ट फ्लाइंग क्रॉस से सम्मानित किया। 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद 100 से ज्यादा विमानों ने लाल किले के ऊपर से फ्लाई पास्ट किया। इस दौरान मार्शल अर्जन सिंह ने ही उनका नेतृत्व किया था।

सभी युद्धों में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
1947 में देश आजाद होते ही पाकिस्तान ने कोई जगहों पर मोर्चा खोल दिया। इस दौरान उत्तरी वायुसेना की कमान अर्जन सिंह ही संभाल रहे थे। उन्होंने अपने कुशल नेतृत्व की वजह से दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए और भारतीय सेना को विजय मिली। उनकी वीरता को देखते हुए तत्कालीन रक्षा मंत्री वाई बी चव्हाण ने कहा था कि एयर मार्शन अर्जन सिंह हीरा हैं, वे अपने नेतृत्व के धनी हैं। इसके बाद मार्शल 1962 की लड़ाई में वायु सेना के उप प्रमुख पद पर तैनात थे। इस लड़ाई में भी उन्होंने कुशल नेतृत्व का परिचय दिया। 1965 में उनके नेतृत्व में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए। पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बाद वायु सेना प्रमुख से उनकी रैंक बढ़ाकर फील्ड मार्शल कर दी थी। इस पद पर पहुंचने वाले वे वायुसेना के पहले अधिकारी थे।

व्हील चेयर पर बैठकर दी थी डॉ. कलाम का सलामी
जब डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का निधन हुआ तब वे अस्वस्थ थे। इसके बावजूद वे व्हील चेयर पर बैठकर डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि पहुंचे और खड़े होकर उनको सलामी दी। स्वतंत्रता दिवस हो या फिर गणतंत्र दिवस वे हर देश के हर कार्यक्रम में नजर आते हैं।