3 नवंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मैक्स अस्पताल पर लगाया 24 लाख का जुर्माना, 12 साल पहले मरीज के इलाज में की थी लापरवाही

मृतक की पत्नी का कहना है कि डॉक्टरों ने सहीं समय पर उनके पति का इलाज नहीं किया, ईसीजी रिपोर्ट को किया अनदेखा
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Mohit Saxena

•

Updated: 23 Aug 2018, 11:28 AM IST

max

मैक्स अस्पताल पर लगाया 24 लाख का जुर्माना, 12 साल पहले मरीज के इलाज में की थी लापरवाही

गुरुग्राम। 12 साल पहले एक मरीज के इलाज में लापरवाही को लेकर मैक्स अस्पताल पर 24 लाख का जुर्माना लगाया गया है। अस्पताल पर आरोप है कि उसने मरीज के इलाज में लापरवाही बरती थी। दिल्ली के राष्ट्रीय उपभोक्ता निवारण आयोग ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस मार्ग पर स्थित मैक्स अस्पताल पर यह जर्माना लगाया है। रोहणी की रहने वाली सुमन जगी और उनके बेटे का कहना कि अस्पताल ने इलाज के दौरान कई बातों की अनदेखी की। पत्नी का कहना है कि 2006 जब वह अपने पति को सीने में जलन की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं, तब डॉक्टरों ने उनकी इस परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि पति गजेंद्र जग्गी की मौत डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से हुई है।

ईसीजी में गलत रिपोर्ट थी

पत्नी का कहना कि वह जब अस्पताल में अपने पति को लेकर पहुंची थीं तो डॉक्टरों ने उन्हें ईसीजी कराने को कहा। उस दौरान ईसीजी रिपोर्ट को डॉक्टरों ने नार्मल बताया और उनका दर्द कम करने के लिए इजेक्शन देने शुरू कर दिए। डॉक्टरों ने हार्ट अटैक के लक्षण को नजरअंदाज कर दिया। करीब 45 मिनट तक उनके पति को डॉक्टरों ने अटेंड तक नहीं किया। वह डॉक्टरों को उन्हें देखने के लिए कहती रहीं, मगर किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया।

मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की राय ली

राष्ट्रीय उपभोक्ता निवारण आयोग ने फैसला देने से पहले मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की राय ली है। यहां के डॉक्टरों का कहना है कि जग्गी की मेडिकल रिपोर्ट से साबित होता है कि उनकी स्थिति उस दौरान ठीक नहीं थी। उन्हें तुरंत आपात सेवाएं मुहैया कराई जानी चाहिए थीं। आयोग का कहना है कि मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट के बाद यह साबित हो गया कि मैक्स के डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरती थी। वहीं मैक्स के प्रवक्ता का कहना है कि अभी उनके पास इस तरह का कोई निर्देश नहीं आया है। इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। हालांकि इस तरह का कोई निर्देश अगर उनके सामने आता है, तो वह अपनी तरफ इसके खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता निवारण आयोग में अपील करेंगे।