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तालिबान संग वार्ता पर उपजा विवाद, विदेश मंत्रालय ने कहा- भारत की भागीदारी अनाधिकारिक

विवाद गहराने के बाद अब विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर इस बारे में सफाई दी है
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नई दिल्ली

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Siddharth Priyadarshi

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Updated: 10 Nov 2018, 8:10 AM IST

India and Taliban at one stage

तालिबान संग वार्ता पर उपजा विवाद, विदेश मंत्रालय ने कहा- भारत की भागीदारी अनाधिकारिक

नई दिल्ली। अफगान शांति वार्ता में भारत के शामिल होने से विवाद पैदा हो गया है। इस वार्ता में तालिबान के साथ मंच साझा करने को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार निशाने पर है। विवाद गहराने के बाद अब विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर इस बारे में सफाई दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने शुक्रवार शाम आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस वार्ता में भारत की भागीदारी अनाधिकारिक स्तर पर है।

तालिबान संग मंच साझा करने पर विवाद

अफगान शांति वार्ता में भारत और तालिबन के एक मंच पर आने से विवाद उत्पन्न हो गया था। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख उमर अब्दुल्ला ने इस वार्ता में भारत के शामिल होने पर सवाल उठाए। इस बैठक में शामिल होने के सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए उम्र अब्दुला ने कहा कि सरकार जब तालिबान के साथ वार्ता में शामिल हो रही है तो जम्मू-कश्मीर में सभी पक्षों के साथ ऐसी बातचीत क्यों नहीं कर रही है। विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस बारे में आपत्ति जताई है।

विदेश मंत्रालय की सफाई

भारत के शामिल होने को लेकर देश में उठाए जा रहे हैं सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि इस वार्ता में भारत की भागीदारी अनाधिकारिक स्तर पर है। भारत की नीति स्पष्ट करते हुए रवीश कुमार ने कहा कि जहां भी अफगानिस्तान में शांति और सुलह की कोशिश होगी, हम उसमें शामिल होंगे। रवीश कुमार ने साफ कहा कि इस बैठक में भारत अनाधिकारिक तौर पर शामिल हो रहा है। उन्होंने कहा कि रूस ने भारत को इस बैठक में शामिल होने का न्योता दिया था लेकिन भारत ने संगठन स्तर पर इसमें शामिल होने के बजाय अपने प्रतिनिधि भेजे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत अफगानिस्तान में शांति और सुलह के सभी प्रयासों का समर्थन करता है।

अफगान शांति वार्ता

बता दें कि शुक्रवार को रूस में अफगानिस्तान मुद्दे पर होने वाली बैठक में भारत भी शामिल हो रहा है । मास्को में होने वाली इस बैठक में भारत की उपस्थिति आधिकारिक स्तर पर नहीं है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के जानकरों का मानना है कि भारतीय प्रतिनिधियों के शामिल होने की घटना बेहद चौंकाने वाली है। यह पहली बार है जब भारत तालिबान के साथ मंच साझा कर रहा है। अब तक भारत तालिबान को राजनीतिक ताकत मानने से इंकार करता रहा है। भारत की नीति तालिबान को स्पष्ट रुप से एक आतंकी संगठन मानने की रही है। भारत की ओर से इस बैठक में पूर्व वरिष्ठ राजनयिक टीसीए राघवन और अमर सिन्हा भाग ले रहे हैं।