
प्रवासी महिला मजदूर ने बच्चे को जन्म देने के बाद 150 किलोमीटर पैदल यात्रा की।
नई दिल्ली। पूरा देश इन दिनों कोरोना वायरस ( coronavirus ) से जूझ रहा है। कोविड-19 के कारण देश में लॉकडाउन ( Lockdown 3.0 ) लागू है। लॉकडाउन में फंसे काफी संख्या में प्रवासी मजदूर ( Migrants Labours ) पैदल ही अपने गांव के लिए निकल पड़े हैं। कई-कई दिन और सैकड़ों-हजारों किलोमीटर की पैदल यात्रा करने पर लोग मजबूर हैं। इसी कड़ी में नासिक ( Nashik ) से सतना ( Satna ) जा रही एक गर्भवती महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया। सबसे हैरानी की बात ये है कि डिलीवरी के दो घंटे बाद ही महिला ने 150 किलोमीटर पैदल चली। यह पूरा मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, 30 साल की गर्भवती महिला शकुंतला ( shakuntala ) अपने पति और कुछ गांववालों के साथ महाराष्ट्र ( Maharashtra ) के नासिक से मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh ) के सतना के लिए पैदल ही निकल पड़ी। बताया जा रहा है कि ये लोग जब पिपरी के गांव के पास पहुंचे तो शंकुतला को प्रसव पीड़ा होने लगी। लेकिन, उन लोगों को दूर-दूर तक कोई हॉस्पिटल नजर नहीं आया। लिहाजा, महिलाओं ने सड़क किनारे साड़ियों का घेरा बनाया और शकुंतला की डिलीवरी कराई गई। शकुंतला ने एक स्वस्थ्य बच्ची को जन्म दिया।
बच्ची को जन्म देने के बाद शकुंतला ने दो घंटे आराम किया है। लेकिन, दो घंटे बाद ही सबने फिर पैदल यात्रा शुरू कर दी। यात्रा करने वालों में शकुंतला भी शामिल थी। बताया जा रहा है कि शकुंतला का यह पांचवा बच्चा था। सभी बच्चों और अपने पति के साथ शकुंतला ने डिलीवरी के बाद करीब 160 किलोमीटर की यात्रा की और अपने गांव पहुंची। बताया जा रहा है कि जब ये लोग राज्य की सीमा के पास पहुंचे तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका और उनसे पूछताछ की। सारी सच्चाई जानने के बाद पुलिसकर्मियों ने उनकी मदद की और गांव तक भिजवाने की व्यवस्था भी कराई। सभी को एकलव्य छात्रावास पहुंचा गया और वहां उनके लिए सारी व्यवस्था कराई गई। फिलहाल, दोनों पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। लेकिन, शकुंतला के हिम्मत की चर्चा हर तरफ हो रही है।
Published on:
13 May 2020 09:33 am
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