पत्रिका से खास बातचीत में अनुराग ठाकुर ने खींचा 'AatmaNirbhar Bharat' का खाका, जानें कैसा होगा भविष्य का भारत?

  • घोषणाओं पर अल्पकालिक विराम लगा, एक्शन जारी रहेगा
  • रेलवे के निजीकरण की अभी कोई चर्चा नहीं हुई
  • जरूरत पड़ी तो दूसरे सेक्टर्स की मदद भी की जाएगी
  • लौट रहे मजदूरों के लिए मनरेगा में 1लाख करोड़ दिए

मुकेश केजरीवाल

नई दिल्ली। देश के वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ( Minister of State for Finance Anurag Thakur ) ने आत्मनिर्भर भारत अभियान ( AatmaNirbhar Bharat Abhiyaan ) और देश के आर्थिक हालात से लेेकर प्रवासी मजदूरों ( Migrant workers ) तक की समस्याओं पर पत्रिका ( Patrika.com ) के साथ खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने कोरोना वायरस ( Coronavirus ) के ग्रहण के बीच देश की अर्थव्यवस्था ( Indian Economy ) को गति देने के फार्मूले को भी बताया तो गरीब के लिए दो जून की रोटी का इंतजाम करने की व्यवस्था के बारे में भी बात कही। आइए जानते हैं अनुराग ठाकुर से पत्रिका की खास बातचीत के कुछ अंश...

प्रवासी मजदूरों की सकुशल वापसी की व्यवस्था नहीं हो सकती थी?

ठाकुर- केंद्र सरकार ने तुरंत कदम उठाए। देश के 80 करोड़ गरीबों को तीन महीने का अनाज दिया गया। 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को दो महीने के लिए अनाज दिया गया। लौटने के लिए रेल की व्यवस्था की और 85 प्रतिशत लागत उठाई, भोजन-पानी की व्यवस्था मुफ्त में कारवाई। लौट कर काम मिल सके इसके लिए 1 लाख करोड़ का मनरेगा में प्रावधान किया है।

सीधे लोगों के खाते में ज्यादा धन पहुंचता, तो बेहतर नहीं होता?

ठाकुर- एक तरीका है मछली परोस देना और दूसरा है मछली पकड़कर अपने भोजन का स्वयं प्रबंध करने लायक बनाना, यानी आत्मनिर्भर बनाना। पैकेज में इंडस्ट्रीज और छोटे उद्यमी से लेकर किसानों तक की मदद करने का प्रयास किया है। उनके रोजगार व कमाई के अवसर भी बढ़ेंगे और वे आत्मनिर्भर होंगे तो भारत भी आत्मनिर्भर होगा।

लोगों को पैसे डायरेक्ट भी दिए गए हैं। पीएम गरीब कल्याण पैकेज के तहत 41 करोड़ गरीबों को 52 हजार करोड़ की रकम दी गई है। पीएम किसान योजना के तहत 8 करोड़ किसानों को और 20 करोड़ महिला खाताधारकों को सीधे खाते में रकम पहुंचाई गई है। पौने तीन करोड़ विधवा माताओं, दिव्यांगों और बुजुर्गों को अलग से नकद रकम जारी की गई। 2.20 करोड़ निर्माण मजदूरों के लिए 3950 करोड़ रुपए का लाभ प्रदान किया गया है। 6 करोड़ गरीब महिलाओं को फ्री गैस सिलेंडर दिए गए।

बड़े स्तर पर निजीकरण होगा। क्या रेलवे में भी होगा?

ठाकुर- रेलवे के निजीकरण का अभी कोई कदम नहीं उठाया गया है न ही कोई चर्चा हुई है।

सरकार लोकल कंपनी को बढ़ावा देने की बात कह रही और विदेशी निवेश भी लुभा रही?

ठाकुर- हमने आत्मनिर्भर भारत के लिए एक डिटेल रोडमैप तैयार किया है। इसमें स्थानीय प्रोडक्ïशन को बल मिलेगा। आज दुनिया का हर देश उस दिशा में चला है। 137 करोड़ भारतीयों के कारण एक बड़ी मार्केट यहां उपलब्ध है, इसलिए विदेशी निवेश को यह फायदा है।

2014 से पहले भारत दूसरे नम्बर पर इलेक्ट्रानिक सामानों का आयात करता था। आज मोदीजी की नीतियों के कारण भारत मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। विदेशी कंपनियां यहां निवेश करेंगी तो हमारा लोकल प्रोडक्ट होगा। जो हमारे लोकल प्रोडक्ट हैं उनको तकनीकी की जानकारी भी मिलेगी और आगे बढऩे का बल मिलेगा और यहां से उसको निर्यात करने के अवसर भी मिलेंगे।

कोरोना संकट से निपटने में पैकेज कितना मददगार होगा?

ठाकुर- पैकेज सभी वर्गो के हितों को ध्यान में रख कर बनाया है। इसके अलावा आपको यह भी नहीं पता है कि आने वाले दिनों में कोविड-19 की मार कहां-कहां पड़ेगी। भगवान ना करे लेकिन अगर इसका ज्यादा असर हुआ तब भी हमें लडऩे के लिए तैयार रहना होगा।

आने वाले समय में स्थिति नहीं सुधरी तो फिर से मदद की जरूरत पड़ सकती है...

ठाकुर- माननीय प्रधानमंत्रीजी के नेतृत्व में भारत ने जो कदम उठाए हैं बहुत कारगर साबित हुए हैं। दुनिया में भूरी-भूरी प्रशंसा हुई। भविष्य में जितनी जैसी जरूरत होगी हम कोई भी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

कई सेक्टर पर भारी मार पड़ी है। इनके लिए सरकार क्या करने जा रही है? बाकी उद्योगों के लिए कोई पैकेज आएगा?

ठाकुर- पिछले दो महीने में दुनिया भर के देशों में लगभग हर सेक्टर पर फर्क पड़ा है। हमने अभी तक जो कदम उठाए हैं, इनसे अधिकांश सेक्टर को सीधा या परोक्ष लाभ मिलेगा। बाकी जो रह गए हैं उनके लिए मैं यही कहना चाहता हूं कि हमने अभी एनाउंसमेंट पर अल्पकालिक विराम लगाया है एक्शन जारी रहेगा। भविष्य में भी जरूरत पड़ी तो इन सेक्टर्स के लिए जो संभव होगा मदद की जाएगी।

कोरोना से पहले भी हमने व्यक्तिगत टैक्स हो, कॉरपोरेट टैक्स हो इन सबकी दरों में कटौती करके छूट दी थी। न केवल उद्योगों को राहत दी गई, बल्कि उन्हें बढ़ावा देने के लिए काफी बड़े रिफॉर्म लाए गए हैं।

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Mohit sharma
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