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दिव्यांगों की पीड़ा, एयरपोर्ट पर किसी की उतरवाई जींस तो किसी को रेंगकर जाना पड़ा 

भारतीय एयरपोर्ट पर दिव्यांगों के साथ आए दिन असंवेदनशील घटनाएं होती रहती हैं।

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Sweta Pachori

Sep 03, 2016

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नई दिल्ली। पैरा ओलम्पिक में दो बार मेडल जीत चुके आदित्य मेहता के साथ पिछले सप्ताह एयरपोर्ट पर अमानवीय तरीके से सिक्योरिटी चैकिंग हुई। आदित्य मेहता को दो भारतीय एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी चैकिंग के दौरान अपना कृत्रिम पैर हटाना पड़ा। इस घटना के बाद आदित्य ने फेसबुक पोस्ट की एक सीरिज में अपना दर्द भी बयां किया। मेहता ने लिखा कि दिव्यांगों के लिए भारतीय एयरपोर्ट पर संवेदनशील चैकिंग होनी चाहिए। उनको ये सब अपने लिए गरिमामय नहीं लगा।

सिविल एविएशन के पास बॉडी स्कैनर के लिए पैसे नहीं है
इस घटना ने भारत की यात्रा करने वाले दिव्यांगों के सामने आने वाली चुनौतियों की तरफ इशारा किया है। ये अकेली ऐसी घटना नहीं है। भारतीय एयरपोर्ट पर दिव्यांगों के साथ आए दिन ऐसी असंवेदनशील घटनाएं होती रहती हैं। आदित्य मेहता जोकि एक पैरा साइक्लिस्ट हैं।

ये एशियन पैरालिम्पक में दो सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। पिछले सप्ताह बेंगलुरु के अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर चैकिंग के लिए अपना कृत्रिम पैर हटाना पड़ा। उसके कुछ ही दिनों बाद ऐसा ही किस्सा दिल्ली एयरपोर्ट पर हुआ। फेसबुक पर मेहता ने लिखा कि एयरपोर्ट पर उन्हे एक असिसटेंट कमांडडेंट ने कहा कि सिविल एविएशन के ब्यूरो के पास बॉडी स्कैनर लगाने के पैसे नहीं है।

व्हीलचेयर नहीं था, रेंगकर पहुंची थी अपने कोच तक
वहीं दिल्ली की एक प्रोफेसर और दिव्यांगों के अधिकारों के लिए काम करने वाली अनीता घई ने अपने साथ हुआ किस्सा बताया। अनीता ने बताया कि जनवरी में दिल्ल्ी के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट पर उन्हे व्हीलचेयर तक नहीं मिली। इस वजह से अनीता को दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद पैसेंजर कोच तक रेंगकर आना पड़ा।
एयरपोर्ट पर उतरवाई गई दिव्यांग महिला की जींस
मुंबई एयरपोर्ट पर जनवरी में एक दिव्यांग महिला को बहुत बेइज्जती बर्दाश्त करनी पड़ी। मुंबई में रहने वाले अंतरा तेलांग से मुंबई एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी चैक के नाम पर उनकी जींस उतरवा ली गई। जींस उतारकर अपना कृत्रिम पैर हटाना पड़ा। अंतरा ने कहा कि वो एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर का इस्तेमाल करें। मगर उसे जबरन एक प्राइवेट कमरे में ले जाकर जींस उतारनी पड़ी।

जबरदस्ती विमान से उतारा, एयरलाइन को देने पड़े 10 लाख
स्पाइसजेट ने 2012 में सामाजिक कार्यकर्ता जीजा घोष को बिना किसी मेडिकल परीक्षण के विमान से उतार दिया। घोष मस्तिष्क पक्षाघात से पीडि़त थी। जीजा घोष ने इसके बाद कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए विमान कंपनी को 10 लाख रुपए देने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि एयरलाइन्स ने पूरी तरह से असंवेदनशीलता दिखाई है। विमान में दिव्यांगों के साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है।
व्हीलचेयर से उठो वरना फ्लाइट छोड़ दो
दिल्ली एयरपोर्ट पर एक दिव्यांग जावेद आबिदी से सिक्योरिटी अधिकारियों ने बहुत ही गलत व्यवहार किया। अबिदी को सिक्योरिटी चैकिंग के नाम पर जबरदस्ती उनकी व्हील चेयर से उठा दिया गया। यही नहीं सिक्योरिटी अधिकारी ने उन्हे धमकी दी कि या तो हमारे निर्देश मान लो या फिर अपनी फ्लाइट मिस कर दो। ऐसा ही एक मामला अगस्त में दिव्यांग राजीन रंजन के साथ हुआ था।

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