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चोरी का मोबाइल बन जाएगा डिब्बा, इस तकनीक से पलक झपकते धरे जाएंगे चोर

दूरसंचार प्रौद्योगिकी केंद्र (सी-डॉट) ने मोबाइल उपकरण रजिस्टर-एमईआर तंत्र तैयार कर लिया है। इससे चोरी हुए मोबाइल को मिनटों में ट्रैक किया जा सकेगा।

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नई दिल्ली। अब चोर मोबाइल चोरी से तौबा करने वाले है। दरअसल जल्द ही ऐसी तकनीक बाजार में आने वाली है जिसमें चोरी किए गए मोबाइल मिनटों में बेकार हो जाएंगे। यह सिर्फ खिलौने बनकर रह जाएंगे और चोरो को इसे बेचना कठिन हो जाएगा। इसके साथ मोबाइल के इस्तेमाल पर चोर पुलिस की गिरफ्त में होगा। दरअसल, दूरसंचार प्रौद्योगिकी केंद्र (सी-डॉट) ने मोबाइल उपकरण रजिस्टर-एमईआर तंत्र तैयार कर लिया है। इससे चोरी हुए मोबाइल को मिनटों में ट्रैक किया जा सकेगा। इसके साथ आईएमईआई नंबर बदलने की स्थिति में यह महज खिलौना होगा।

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एमईआर तकनीक जुलाई से लागू होगी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मोबाइल की चोरी या लूट की समस्या से निजात पाने लिए एमईआर तकनीक को जुलाई से लागू किया जाएगा। इसके लिए महाराष्ट्र में ट्रायल लिया जाएगा। इसके बाद इस तकनीक को पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि मोबाइल चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। दूरसंचार विभाग ने इसका जिम्मा सी-डॉट को सौंपा है। इसकी मदद से पुलिस को चारों को पकड़ने में काफी मदद मिल सकेगी।

जीएमएमए से मिलान करना होगा आईएमईआई

गौरतलब है कि अब वैश्विक तंत्र मोबाइल संघ (जीएसएमए) की ओर से जारी आईएमईआई का ही इस्तेमाल होगा। जीएसएमए वह संस्था है जो मोबाइल के लिए आईएमईआई नंबर जारी करती है। इस नंबर के बिना कोई भी सिम मोबाइल में नहीं चल सकता। सी-डॉट एमईआर तंत्र के लिए सेवा प्रदाता को भी जिम्मेदार बनाने जा रहा है। इसके तहत टेलीकॉम कंपनियां मोबाइल के लिए जारी आईएमईआई का मिलान जीएसएमए के डाटा से करेंगी। मिलान नहीं होने पर मोबाइल में सिग्नल नहीं आएंगे और वह कूड़ा हो जाएगा। वहीं बदलाव किए बिना इस्तेमाल हो रहे चोरी के मोबाइल को एमईआर तंत्र से पुलिस कुछ ही पल में ट्रैक कर लेगी।

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