
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून ( CAA ) को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर जल रही है। उत्तर-पूर्वी ( North East ) दिल्ली में भड़की हिंसा ( Violence ) में अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस हिंसा में एक ओर जहां उपद्रवी खून के प्यासे हो रहे थे। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी थे जो किसी तरह लोगों की जिदंगी बचाने में जुटे थे। इनमें एक मसीहा ऐसा भी है, जिसने अपने बेटे के साथ मिलकर महज एक घंटे में करीब 80 लोगों की जानें बचाई। सबसे खास बात तो यह है कि न तो उन्होंने किसी की उम्र देखी और न ही समुदाय। बस एक ही जुनून था किसी तरह लोगों को बचाना है।
जी हां, इस शख्स का नाम है मोहिंदर सिंह। 53 साल के मोहिंदर सिंह ( Mohinder Singh ) और उनके बेटे इंद्रजीत( Indrajeet Singh ) सिंह ने इंसानियत दिखाते हुए अपनी जान की बाजी लगाकर हिंसा में फंसे इतने लोगों की जिंदगी बचाकर एक मिसाल कायम की है।
मोहिंदर सिंह मूलरूप से करदामपुर में रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि 24 फरवरी की शाम करीब पांच बजे गोकुलपुरी का माहौल बिगड़ने लगा। देखते ही देखते मामला इतना बिगड़ गया कि लोगों की जान पर बन आई। उन्होंने कहा कि मैं और मेरे बेटे इंद्रजीत ने बुलेट और स्कूटी से महज एक घंटे में 60-80 लोगों को एक किलोमीटर दूर करदामपुर पहुंचाया। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा इंद्रजीत बुलेट पर था और मैं स्कूटी पर। एक बार में तीन-तीन, चार-चार लोगों को बिठाकर हमने करदामपुर पहुंचाया। सिंह का कहना है कि इस दौरान हमने कुल 20 राउंड लगाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को बचाया गया उनमें महिलाएं, बच्चे और पुरुष शामिल थे।
मोहिंदर सिंह के अनुसार उन्होंने यह नहीं देखा कि कोई हिन्दू है या मुसलमान। सिंह ने बताया कि मैनें कुछ बच्चों को देखा, उन्हें देखकर लगा कि जैसे वह मेरे ही बच्चे हैं और मैंने तय किया कि उन्हें कुछ नहीं होने दूंगा। उन्हें मदद की जरूरत थी और हमने बिना देरी किए उनकी मदद की और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
यहां आपको बता दें कि गोकुलपुरी में पिछले दिनों तेज हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में कई जानें चली गई और कई लोग अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। गोकुलपुरी इलाके में कई मुस्लिमों की दुकानें जला दी गई, कई घर जला दिए गए और मस्जिदों को भी नुकसान पहुंचाया गया। यहां तक कि हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या गोकुलपुरी में ही हुई थी।
इस दौरान मोहिंदर सिंह ने सिक्ख दंगे का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जिस वक्त यह दंगा हुआ था उस वक्त उनकी उम्र मजह 13 साल की थी और जब आज यह हिंसा हुई तो पूरा घटनाक्रम रिकॉल हो गया।
सिंह ने बताया कि 24 फरवरी के बाद पहली बार 27 फरवरी को उन्होंने अपनी दुकान खोली। दंगे से ठीक पहले कुछ बाहरी लोग वहां पहुंचे और पीएम नरेन्द्र मोदी का नाम लिया और जय श्रीराम के नारे लगाए। ऐसा माहौल देखकर गोकुलपुरी के मुस्लिम काफी सहम गए थे। सभी लोग पास की मस्जिद में जमा हुए। इसके बाद सभी ने तुरंत उस इलाके को छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि हमने उन्हें रुकने के लिए कहा लेकिन वे काफी डरे हुए थे। वे अपनी जिंदगी को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। इसके बाद हमने उन्हें अपनी गाड़ियों से करदामपुर पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि उस वक्त तक स्थिति काफी बिगड़ गई थी। हमारे पास इतना समय नहीं था कि हम पार्किंग से कार लेकर आए। हमनें उन्हें बुलेट और स्कूटी से पहुंचाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए न तो हमें किसी का धन्यवाद चाहिए और न ही फेवर चाहिए। हमने वही किया जो सही था। उन्होंने बताया कि महज दो से तीन दिनों में गोकुलपुरी के मुस्लिमों को काफी नुकसान हुआ है। उनके घर लूट लिए गए, दुकाने जला दी गई। सही मायनों में कहा जाए तो एक तरह से उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई।
Updated on:
29 Feb 2020 07:29 am
Published on:
28 Feb 2020 05:59 pm
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