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नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मिशन चंद्रयान-2 के बीच चांद से जुड़ी एक और जानकारी दुनिया भर में हलचल पैदा कर रही है। दरअसल, यह हलचल ऐसे कुछ अत्यंत छोटे जीवों से जुड़ी है, जिन्होंने कुछ दिन पहले चांद पर अपनी बस्ती बना ली है।
सबसे खास बात यह है कि ये अजीब प्रकार के जीव किसी भी जिंदा रहने में सक्षम हैं। दरअसल, बायोलॉजी में टार्डीग्रेड्स या जल के भालू के नाम से पहचाने वाले ये बेहद सूक्ष्म जीव पिछले कुछ दिनों में ही चांद पर बस गए हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि ये जीव सालों तक बिना खाना और पानी के और हर तरह के मौसम व परिस्थितियों में जिंदा रह सकते हैं। यहां तक कि रेडिएशन का भी इन पर कोई असर नहीं होता है।
यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जो जीव नंगी आंखों से भी न दिखाई देता हो, वह आखिर चांद पर पहुंचा कैसे? दरअसल, इस सवाल का जवाब इजरायल के मिशन मून से जुड़ा हुआ है।
कुछ समय पहले इजरायल ने भी अपने मिशन मून के तहत चांद पर एक सैटेलाइट भेजने का प्रयास किया था। बेरेशीट नाम का यह इजरायली यान चांद पर लैंड करने से पहले क्रैश हो गया।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस यान में एक खास पैकेज था। ल्यूनर लाइब्रेरी के नाम वाले इस पैकेज में ऑर्क मिशन फाउंडेशन संस्था ने बेरेशीट पर फिट किया था।
इस ल्यूनर लाइब्रेरी में मानव इतिहास को 3 करोड़ पन्नों में समेटा गया था। इसमें मानव जाति के डीएनए सैंपल और हजारों डिहाइड्रेटेड टार्डीग्रेड्स भी मौजूद थे।
गौरतलब है कि टार्डीग्रेड्स जीव आकार एक मिलीमीटर से भी छोटे होते हैं।
ऑर्क मिशन फाउंडेशन के चेयरमैन नोवा स्पीवैक की मानें तो शायद जब चांद पर बेरेशीट की क्रैश लैंडिंग हुई तो ये टार्डीग्रेड्स किसी तरह से जिंदा बच गए होंगे।
उनका कहना है कि अगर ये जीव जिंदा बचने में सफल हो गए होंगे तो द के दबाव को आसानी से झेल सकते हैं। हालांकि फिलहाल वैज्ञानिक इस संबंध में गहन जांच कर रहे हैं।
Updated on:
03 Nov 2019 02:15 pm
Published on:
03 Nov 2019 02:12 pm
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