
one by giving birth left
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में टिटनेस से होने वाली मातृ-शिशु मृत्यु दर शून्य हो गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस बात का खुलासा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट में हुआ है। डब्ल्यूएचओ द्वारा इस आश्य का प्रमाण पत्र इसी माह जारी कर दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक जिले की लगभग 32 लाख की आबादी में हर साल 99 हजार महिलाएं गर्भवती होती हैं।
इसमें 85 हजार महिलाएं बच्चों को जन्म देती हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 तक के आंकड़ों पर गौर करे तो पाते हैं कि बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं में दो प्रतिशत ऐसी प्रसूताएं थी जिन्हें टिटनेस की बीमारी होने से जच्चा व बच्चा दोनों की मृत्यु हो जाती थी। इसमें लगभग 17 सौ प्रसूताएं प्रतिवर्ष इसका शिकार होती थीं। वर्ष 1977 में गर्भवती महिलाओं के लिए इस टीकाकरण की शुरुआत की गई। तब इतना प्रचार प्रसार न होने से परिजनों को इसकी जानकारी ही नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि इसकी वजह से लोग संस्थागत प्रसव कराते रहे। कई बार तो प्रसव भी ऐसी जगह कराया जाता जहां साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता था। इससे इंफेक्शन फैल जाता था और जच्चा बच्चा दोनों की मौत हो जाती थी। सूत्रों ने बताया कि धीरे-धीरे प्रचार प्रसार बढ़ता गया। आशाओं ने भी काम करना शुरू कर दिया। साथ ही प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से चलाई गईं तमाम योजनाएं गांव-गांव पहुंची तब लोगों में थोड़ी से जागरूकता बढ़ी।
वर्ष 2007-08 में टिटनेस से मरने वाले जच्चा-बच्चा का आंकड़ा घटकर प्रति वर्ष सात का रह गया। यहां मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में हाल में प्राप्त डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में उन्नाव में टिटनेस से मरने वाले जच्चा-बच्चा का आंकड़ा शून्य दिखाया गया है।

Published on:
05 Dec 2015 09:44 am
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