20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पहली बार एवरेस्ट पर चढ़ाई हुई बंद, नेपाल सरकार को हो सकता है 9 हजार करोड़ का घाटा

Mount Everest : विदेशी पर्यटकों के न होने से काठमांडू के बेस कैंप खाली पड़े हैं लॉकडाउन की वजह से इस सीजन चढ़ाई के लिए नहीं दिए गए परमिट

2 min read
Google source verification

image

Soma Roy

Apr 16, 2020

evrest1.jpg

Mount Everest climbing stopped

नई दिल्ली। हमेशा विदेशी पर्यटकों से गुलजार रहने वाला काठमांडू के बेस कैंप बिल्कुल खाली पड़े हैं। यहां से एवरेस्ट बेस कैंप (Base Camp) के लिए लुम्बा जाने वाली उड़ानें पूरी लॉकडाउन (Lockdown) के चलते बंद कर दी गई है। साथ ही एवरेस्ट पर चढ़ाई पर भी रोक लगा दी गई है। इससे लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं। सबसे ज्यादा फर्क वहां के स्थानीय निवासी शेरपाओं को हुआ है। क्योंकि वे गाइड बनकर अपनी कमाई करते थे।

ये ऐसा पहला मौका है जब माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) की चढ़ाई पर रोक लगाई गई हो। चूंकि ये सीजन क्लाइबिंग (Climbing) के लिए सबसे अच्छा होता है, इसलिए सरकार की ओर से परमिट दिए जाने का काम शुरू होना था। मगर कोरोना के कहर की वजह से तीन हफ्ते के लिए नेपाल में लॉकडाउन की घोषणा हुई। साथ ही सभी माउंटेन एक्सपीडिशन पर रोक लगा दी गई।

75 दिन के दिए जाते हैं परमिट
नेपाल सरकार क्लाइंबिग के लिए 75 दिन का परमिट देती है। पर्वतों पर चढ़ाई के शौकीनों से हर साल जीडीपी का 4% रेवेन्यू मिलता है। इस साल, यानी 2020 में 2 मिलियन, यानी करीब 20 लाख पर्यटकों के आने की संभावना थी। मगर कोरोना के चलते यहां टूरिज्म को 150 बिलियन नेपाली रुपए, यानी 9000 करोड़ भारतीय रुपए का नुकसान होगा। जिसमें एयरलाइन, होटल, ट्रैवल, ट्रैकिंग, एक्सपीडिशन और खाना-पीना सब शामिल है।

रोजगार छिना तो खेती को मजबूर
माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई पर रोक लगने से सबसे ज्यादा नुकसान वहां के नजदीकी गांव शेरपा के लोगों को हुआ है। चूंकि विदेशी पर्यटकों के जरिए ही उनकी कमाई होती थी, लेकिन सब चीजें बंद होने की वजह से उनका रोजगार छिन गया है। ऐसे में वे खेती करके अपना गुजारा कर रहे हैं। मालूम हो कि बेस कैंप के सबसे नजदीक गांव शेरपा की दूरी 20 किमी के करीब है।