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National Education Day: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस आज, उच्च शिक्षा में क्यों हैं हम पीछे

पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने उच्च शिक्षा की जो कल्पना की थी, वह सात दशक बाद भी पूरी होती दिखाई नहीं दे रही।
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नई दिल्ली

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shachindra shrivastava

•

Updated: 11 Nov 2017, 11:02 AM IST

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1950 के दशक में देश में आईआईटी की स्थापना कराने वाले देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने देश की उच्च शिक्षा की जो कल्पना की थी, वह सात दशक बाद भी पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है। इसकी कई वजहें और इस बीच उच्च शिक्षा पर गठित विभिन्न संसदीय समितियों के अलावा दर्जनों स्वतंत्र निकायों की रिपोर्ट भी आई हैं। इन रिपोटï्र्स का अध्ययन करने से साफ हो जाता है कि देश में उच्च शिक्षा का स्तर धीरे-धीरे ही सही ऊपर उठा है, लेकिन उसी अनुपात में यह देश की आम जनता की पहुंच से दूर होती गई है। राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के मौके पर उच्च शिक्षा के हालात पर एक नजर...

क्या बजट है बड़ी दिक्कत?
काफी हद तक बजट एक बड़ी समस्या है। इस साल कुल बजट का करीब 3.71 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा के लिए आवंटित है, जो 79.68 हजार करोड़ रुपए है। इसमें से भी 46.36 हजार करोड़ रुपए स्कूली शिक्षा पर खर्च किए जाने हैं। यानी उच्च शिक्षा के हिस्से में महज 33.32 हजार करोड़ रुपए का बजट है। राजनीतिक, आर्थिक तौर पर हम जिन देशों के समकक्ष है, उनके मुकाबले यह खर्च काफी कम है।

निजी क्षेत्र भी है हिस्सेदारी?
कम बजट की समस्या सरकारी संस्थानों में तो है, लेकिन नहीं भूलना चाहिए कि देश की उच्च शिक्षा में निजी क्षेत्र की भी बड़ी हिस्सेदारी है। अगर निजी क्षेत्र के निवेश को भी मिलाएं तो देश की उच्च शिक्षा पर खर्च करीब 1.50 लाख करोड़ हो जाता है, जो शीर्ष देशों के शिक्षा बजट के बराबर ही है।

क्या संस्थानों की है कमी?
देश में केंद्रीय, राज्य, ड्रीम्ड, निजी आदि सभी किस्म की यूनिवर्सिटीज की संख्या 760 के करीब है। इनसे 38498 कॉलेज संबद्ध हैं। इसके अलावा स्वतंत्र उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या 12276 है। इन सभी में साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। यह चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी उच्च शिक्षित छात्रों की संख्या है।

फिर करोड़ों छात्र उच्च शिक्षा से बाहर क्यों?
कक्षा 12 तक शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की संख्या करीब 26 करोड़ है, जो उच्च शिक्षा में आते-आते घटकर 3.42 करोड़ रह जाती है। संस्थानों की संख्या ज्यादा हो तो यह कई गुना ज्यादा छात्र उच्च शिक्षा हासिल कर सकते हैं।

सभी देशों में उच्च शिक्षा में छात्र संख्या कम
दुनिया के लगभग सभी विकासशील देशों में उच्च शिक्षा में छात्रों की संख्या स्कूली छात्रों के मुकाबले कम है, लेकिन भारत में महज 13 प्रतिशत छात्र ही उच्च शिक्षा हासिल कर पाते हैं, जबकि अन्य देशों में यह प्रतिशत 30 से 45 प्रतिशत तक है।

कौन पहुंच पाता है उच्च शिक्षा तक
उच्च शिक्षा के सरकारी संस्थानों की संख्या सीमित है। जाहिर है ऐसे में गरीब छात्रों के लिए मौके सीमित होते हैं। उच्च आय वर्ग के छात्रों के पास निजी संस्थानों में जाने का भी मौका होता है। इसके अलावा अति उच्च आय वर्ग के छात्र विदेशों से भी शिक्षा ग्रहण करते हैं।

उच्च शिक्षा का देश को फायदा?
एक बड़ी समस्या यह भी है कि देश को उच्च शिक्षा का फायदा बहुत ज्यादा नहीं होता है। क्योंकि उच्च शिक्षित युवाओं के विदेश जाने की दर बहुत ज्यादा है। अवसर की तलाश में यह छात्र विदेश जाते हैं और उनकी प्रतिभा देश के निर्माण में भागीदार नहीं हो पाती।

उच्च शिक्षा में हिस्सेदारी
क्षेत्र छात्रों का प्रतिशत
मानविकी और सामाजिक विज्ञान 40.24
इंजीनियरिंग व तकनीक 15.89
विज्ञान 15.38
वाणिज्य 13.98
शिक्षा 3.25
चिकित्सा 3.05

दो बड़ी खामियां

शिक्षा विशेषज्ञ नितिन जैन बताते हैं कि महंगी उच्च शिक्षा और अच्छे शिक्षकों की कमी हमारी शिक्षा व्यवस्था की दो बड़ी खामियां हैं। इसके अलावा समाज के हर हिस्से तक उच्च शिक्षा की पहुंच भी नहीं है। हाल के दशकों में उच्च शिक्षा में सरकारी हिस्सेदारी घटी है। फिलहाल 60 प्रतिशत से ज्यादा छात्र निजी संस्थानों से उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अगर हमें दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करनी हैं, तो शिक्षा पर खर्च बढ़ाना होगा। निजी क्षेत्र के भरोसे हम देश के हितों की पूर्ति नहीं कर सकते।

जन्मदिन: मौलाना आजाद ने कराई थी आईआईटी की स्थापना

आज भारत रत्न से सम्मानित स्वतंत्रता संग्राम सैनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्मदिन है। देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद का जन्मदिन राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1950 के शुरुआती दशक में संगीत नाटक अकादमी, साहित्य अकादमी और ललित कला अकादमी का गठन कराने वाले मौलाना आजाद केंद्रीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन रहे। उनकी पहल पर भारत में 1956 में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन की स्थापना हुई। 1950 के दशक में ही उन्होंने सूचना और तकनीक की शिक्षा पर ध्यान देना शुरू कर दिया था। शिक्षा मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में ही इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) का गठन किया गया।


कितना आगे बढ़े हैं हम
साक्षरता
18.3 प्रतिशत थी देश में साक्षरता दर 1951 में, जो बढ़कर 75 प्रतिशत हो गई 2016 में
27.2 प्रतिशत पुरुष ही थे 1951 में पढ़े-लिखे, अब हैं 82 प्रतिशत
8.9 प्रतिशत थी आजादी के वक्त देश की महिला साक्षरता दर, जो अब बढ़कर हो गई है 66 प्रतिशत

शिक्षा संस्थान
27 थी 1950-51 में देश में यूनिवर्सिटीज की संख्या, जो 2014-15 में बढ़कर हो गई है 760
578 कॉलेज थे आजादी के समय। अब देश में 38498 है कॉलेजों की संख्या

उच्च शिक्षा में छात्र
4 लाख थी 1950-51 में उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की संख्या, जो 2015 में बढ़कर 3.42 करोड़ हो गई।