
नई दिल्ली: नारायण दत्त तिवारी का जन्म 1925 में नैनीताल जिले के बलूती गांव में हुआ था। तिवारी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में एमए किया है। बाद में उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री भी हासिल की। 1947 में आजादी के साल ही वह इस विश्वविद्यालय में छात्र यूनियन के अध्यक्ष चुने गए। यह उनके सियासी जीवन की पहली सीढ़ी थी। आजादी के बाद 1950 में उत्तर प्रदेश के गठन और 1951-52 में प्रदेश के पहले विधानसभा चुनाव में तिवारी ने नैनीताल (उत्तर) सीट से सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर हिस्सा लिया। कांग्रेस की हवा के बावजूद वे चुनाव जीत गए और पहली विधानसभा के सदस्य के तौर पर सदन में पहुंच गए। कांग्रेस के साथ तिवारी का रिश्ता 1963 से शुरू हुआ।
एक जनवरी 1976 को वह पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। तिवारी तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। वे उत्तर प्रदेश के उस समय मुख्यमंत्री रहे जब उत्तराखण्ड का गठन नहीं हुआ था। वह अकेले राजनेता हैं जो दो राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश के विभाजन के बाद वे उत्तराखण्ड के भी मुख्यमंत्री बने। केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्हें याद किया जाता है। 1990 में एक वक्त ऐसा भी था जब राजीव गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी दावेदारी की भी चर्चा हुई। पर आखिरकार कांग्रेस के भीतर पीवी नरसिंह राव के नाम पर मुहर लग गई।
विवादों से है गहरा नाता
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी को उस समय बड़ा झटका लगा था जब दिल्ली हाईकोर्ट में उनके रक्त के नमूने संबंधी डीएनए रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया और उस रिपोर्ट के अनुसार पितृत्व वाद दायर करने वाले रोहित शेखर तिवारी ही एनडी तिवारी के बेटे हैं।
दिल्ली में रहने वाले 32 साल के रोहित शेखर तिवारी ने दावा किया था कि एनडी तिवारी ही उसके जैविक पिता हैं और इसी दावे को सच साबित करने के लिए रोहित और उसकी मां उज्ज्वला तिवारी ने 4 साल पहले यानी 2008 में अदालत में एन डी तिवारी के खिलाफ पितृत्व का केस दाखिल किया था।
अदालत ने मामले की सुनवाई की और अदालत के ही आदेश पर पिछले 29 मई को डीएनए जांच के लिए एनडी तिवारी को अपना खून देना पड़ा था। देहरादून स्थित आवास में अदालत की निगरानी में एनडी तिवारी का ब्लड सैंपल लिया गया था। कुछ दिनों पहले हैदराबाद के सेंटर फोर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायएग्नोस्टिक्स यानी सीडीएफडी ने ब्ल़ड सैंपल की जांच रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी।
89 वर्ष की उम्र में शादी रही चर्चित
पितृत्व विवाद में फंसने के बाद रोहित शेखर को अपना बेटा मानने के बाद तिवारी ने रोहित की मां उज्ज्वला शर्मा से विधिवत विवाह कर लिया। तिवारी ने उज्जवला शर्मा से मई 2014 में अपने लखनऊ स्थित आवास पर 89 वर्ष की उम्र में विवाह कर लिया था।
रंगीन मिजाजी से सैक्स स्केंडल में फंसे
तिवारी अपनी रंगीनियों के चलते एक सेक्स स्कैंडल में भी फंस चुके हैं। आंध्रप्रदेश के राज्यपाल रहते हुए ही एक तेलुगू समाचार चैनल ने एक घंटे तक ऐसी तस्वीरें और वीडियो प्रसारित किए, जिनमें 85 वर्षीय तिवारी जैसे दिखने वाले एक शख्स को तीन युवा लड़कियों के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया था।
चैनल ने एक महिला राधिका को यहयह कहते दिखाया गया है कि उसने तिवारी के आग्रह पर उनके एक सहयोगी के माध्यम से इन युवतियों को राजभवन भेजा था। उत्तराखंड की रहने वाली इस महिला ने बताया था कि वह यह खुलासा इसलिए कर रही है क्योंकि राज्यपाल ने बदले में उसे आंध्रप्रदेश में लौह अयस्क खदान के लिए लाइसेंस दिलाने का वादा किया था, पर वादा पूरा नहीं किया।
Published on:
20 Sept 2017 08:48 pm
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