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NEW STUDY : विदेशों की अपेक्षा भारत की कामकाजी महिलाओं पर ज्यादा प्रभाव

कोरोना महामारी के दौर में महिलाएं घर से नौकरी तक कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही हैं। विदेशों में कामकाजी महिलाओं की तुलना में भारत में ज्यादा प्रभाव पड़ा है। यह खुलासा लिंक्डइन अपॉच्र्युनिटी इंडेक्स 2021 की सर्वे रिपोर्ट में हुआ है। यह पुरुषों-महिलाओं को लेकर धारणा को उजागर करती है।

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NEW STUDY

नई दिल्ली. कोरोना महामारी के दौर में महिलाएं घर से नौकरी तक कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही हैं। विदेशों में कामकाजी महिलाओं की तुलना में भारत में ज्यादा प्रभाव पड़ा है। काम व सैलरी के लिए कड़ी लड़ाई लड़ रही हैं। उन्हें पुरुषों की अपेक्षा कमतर आंका जा रहा है। ज्यादातर घरेलू जिम्मेदारियों का बोझ उन्हीं के सिर पर है।

22 फीसदी को तवज्जो नहीं
रिपोर्ट के अनुसार एशिया पेसिफिक देशों में 22 फीसदी महिलाओं को पुरुषों की तुलना उतनी तवज्जो नहीं दी जाती है। 85 फीसदी महिलाओं ने कहा कि 60 फीसदी क्षेत्रीय औसत की तुलना में समय पर प्रोन्नति, वेतन व नौकरी का अवसर नहीं मिलता है।
वर्कफ्रॉम होम : बच्चे की जिम्मेदारी
वर्क फ्रॉम होम की वजह से कामकाजी मांओं की दिक्कतें बढ़ी हैं। अभी 10 में से 7 महिला पूरे समय बच्चों की देखभाल कर रही हैं। पुरुषों की बात करें तो पांच में से एक पुरुष ही पूरे समय बच्चों की देखभाल कर रहे हैं।
भेदभाव की वजह घरेलू जिम्मेदारियां
करीब दो-तिहाई कामकाजी महिलाओं का कहना है कि उन्हें पारिवारिक और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण काम में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

घरेलू जिम्मेदारियों बनीं बोझ
21 फीसदी पुरुष महिलाओं को कम वेतन, प्रोन्नति में भेदभाव से सहमत
77 फीसदी कामकाजी महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों को वजह मानतीं
37 फीसदी कामकाजी महिलाओं को कम वेतन व अवसर
25 फीसदी पुरुष कम वेतन व अवसर की बात से सहमत
66 फीसदी महिलाएं मानतीं घरेलू जिम्मेदारियों की वजह से भेदभाव
20 फीसदी कंपनियां महिलाओं को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं
69 फीसदी महिलाएं मानती पारिवारिक, घरेलू जिम्मेदारियां हैं वजह
50 फीसदी को महिलाओं को वरीयता देने वाली कंपनी की तलाश