निर्भया केसः बढ़ सकती है फांसी की तारीख! विनय ने राष्ट्रपति के पास भेजी दया याचिका

  • विनय की क्यूरेटिव पेटिशन पहले ही सुप्रीम कोर्ट में हो चुकी है खारिज।
  • अब राष्ट्रपति को लेना है विनय की दया याचिका पर फैसला।
  • बुधवार को SC ने मुकेश की याचिका खारिज की और अक्षय की स्वीकार।

नई दिल्ली। बीते सात वर्ष से भी ज्यादा वक्त से निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस चल रहा है और फांसी की तारीख मुकर्रर होने के बावजूद दोषियों को सजा नहीं मिल पा रही है। अब जब चारों दोषियों की फांसी में दो दिनों का ही वक्त बचा है, दोषियों के वकील हर संभव कोशिश कर कुछ दिनों की मोहलत जुटाने में लगे हुए हैं। बुधवार को जहां सुप्रीम कोर्ट ने एक दोषी मुकेश की याचिका खारिज की और दूसरे दोषी अक्षय की याचिका पर कल सुनवाई करने को कहा। एक तीसरा दोषी विनय भी अपनी दया याचिका लेकर राष्ट्रपति के पास पहुंच गया।

निर्भया केस के दोषियों की फांसी पर संशय! एक दोषी अक्षय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार

निर्भया केस के चार दोषियों में से एक विनय कुमार शर्मा के वकील एपी सिंह ने बताया कि उनके मुवक्किल ने भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के समक्ष अपनी दया याचिका पेश की है। अब राष्ट्रपति को इस दया याचिका पर फैसला लेना है।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट विनय की क्यूरेटिव पेटिशन पहले ही खारिज कर चुका है। अब उसे राष्ट्रपति के फैसले का इंतजार है।

इससे पहले बुधवार को एक अन्य दोषी अक्षय ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और क्यूरेटिव पेटिशन दायर कर सजा-ए-मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने इस पेटिशन पर सुनवाई के लिए हामी भरी। बृहस्पतिवार दोपहर 1 बजे जस्टिस जेवी रमन्ना की अध्यक्षता में पांच जजों की पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी।

निर्भया केस में फांसी के दो दिन पहले एक और दोषी पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, याचिका दायर कर रखी बड़ी मांग #NirbhayaCase

अक्षय की ओर से क्यूरेटिव पेटिशन दायर करने वाले वकील एपी सिंह ने कहा कि मौजूदा याचिका को सुप्रीम कोर्ट को मंजूर करना चाहिए और इसे 5 मई 2017 के आदेश से अलग देखना चाहिए जिसमें दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी गई थी। अक्षय ठाकुर ने अपनी याचिका में मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की है।

इसके अलावा बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक और दोषी मुकेश की याचिका खारिज कर दी। मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका खारिज किए जाने के फैसले के आदेश को चुनौती दी थी।

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अमित कुमार बाजपेयी
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