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अब रक्षा मंत्रालय की जमीन अधिग्रहीत करेगी केन्द्र सरकार!

भूमि अधिग्रहण बिल लागू करने में विफल रही केन्द्र सरकार ने अब रक्षा मंत्रालय की जमीन अधिग्रहीत करने की तैयारी शुरू कर दी है

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Bhup Singh

Jan 13, 2016

indian army

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सरप्लस जमीन पर है नजर, योजनाओं के लिए करेगी इस्तेमाल
नई दिल्ली। भूमि अधिग्रहण बिल लागू करने में विफल रही केन्द्र सरकार ने अब रक्षा मंत्रालय की जमीन अधिग्रहीत करने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो पीएमओ ने रक्षा मंत्रालय की इस्तेमाल नहीं की जा रही जमीन पर नजरें गड़ा दी हैं और खाली जमीन का ब्यौरा मंगाया है। देश में सबसे ज्यादा जमीन मंत्रालय के नाम है।

रक्षा मंत्रालय के पास 17.30 लाख एकड़ जमीन है जो जरूरत से ज्यादा है। यही नहीं रक्षा मंत्रालय पहले से अधिग्रहीत की गई 50 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन का कोई इस्तेमाल नहीं कर सका और न ही सरकार को इस जमीन के इस्तेमाल की योजना बता पा रहा है। मंत्रालय ने कहा है कि 26 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन उनके काम की नहीं है।

रक्षा मंत्रालय ने केन्द्र से कहा है कि अगर वह चाहे तो अपने इस्तेमाल के लिए वापस ले सकती है। रक्षा मंत्रालय के पास कितनी ज्यादा जमीन है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 5000 एकड से ज्यादा जमीन तो रक्षा मंत्रालय के 95 गोल्फ कोर्स ने घेर रखी है। थल सेना के पास 80 प्रतिशत के करीब, वायु सेना के पास 9 प्रतिशत के करीब और नौ सेना के दो प्रतिशत के करीब जमीन है। कुल जमीन की अनुमानित बाजार कीमत 80 लाख करोड़ के करीब है। 2009 तक मंत्रालय की 15000 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण हो चुका हैै।

सीएजी रिपोर्ट को बनाएगी आधार
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि केन्द्र सरकार भारत के नियत्रंक एवं महालेखा परीक्षक सीएजी की 25 मार्च 2011 को संसद में पेश रिपोर्ट को आधार बना रही है। इस सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया था कि रक्षा मंत्रालय के पास उपलब्ध अतिरिक्त जमीन का इस्तेमाल लोक कल्याण के दूसरे कामों में किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार इसी रिपोर्ट को आधार बना कर रक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जमीन वापस लेकर अपनी अन्य योजनाओं को लागू करने के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है।

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