
नई दिल्ली। एक ओर जहां न्यायालयों में मुकदमों का भार बढ़ता जा रहा है और उनके समाधान के लिए लोगों को सालों लंबा इंतजार करना पड़ता है, वहीं देश के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के सैंकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक उच्च न्यायालय में 407 और उच्चतम न्यायालय में 6 न्यायाधीशों के पद खाली हैं। वहीं मौजूदा समय में देश की अदालतों में 3 करोड़ से अधिक केस विचाराधीन हैं।
लंबित 350 न्यायधीशों की नियुक्ति
सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों वाली समिति ने उच्च न्यायालयों में 350 खाली पदों के लिए जजों का नामांकन कराया था, लेकिन तब से अभी तक उनकी नियुक्तियां लंबित हैं। इनमें से 60 अनुशंसाएं देश के सबसे बड़े इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 160 न्यायाधीशों के सापेक्ष केवल 91 न्यायाधीश ही हैं। प्रोटोकॉल के मुताबिक सरकार पुनर्विचार के लिए एक बार नाम वापस कर सकती है लेकिन अगर कॉलेजियम अपनी मूल सिफारिश की पुष्टि करता है तो नियुक्ति को स्पष्ट करना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि केन्द्र में 60-65 नामों की सूचियां लंबित हैं। जबकि कोलेजियस ने इन नामों की पुष्टि कर दी थी।
400 में से 51 की मंजूरी
अक्टूबर 2015 से सरकार के पास 400 से अधिक न्यायाधीशों के नामांकन आए थे, जिसमें से केवल 51 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है। सरकार के सूत्रों का दावा है कि रिक्त पदों को भरने के लिए कॉलेजियम की ओर से कम से कम छह माह पहले ग्राउंड वर्क पूरा कर लिया जाना चाहिए। सरकार ने उदाहरण के तौर पर बताया कि कॉलेजियम ने न्यायाधीश की सेवानिवृति के एक साल बाद तक उस रिक्त पद को भरने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इस गतिरोध ने पिछले साल तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की ओर से कई बार नाराजगी देखने को मिली थी, जब उन्होंने रिक्त पदों की नियुक्तियों में शीघ्रता लाने की अपील की थी।
Updated on:
03 Sept 2017 01:11 pm
Published on:
03 Sept 2017 12:01 pm
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