योग गुरु रामदेव की कंपनी पंतजलि के आयुर्वेद के डेयरी कारोबार प्रमुख सुनील बंसल की कोरोना से मौत की खबर
नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमण ( Coronavirus in india ) का प्रकोप जारी है। इस बीच योग गुरु रामदेव ( Ramdev ) की कंपनी पंतजलि ( Patanjali ) के आयुर्वेद के डेयरी कारोबार प्रमुख सुनील बंसल की कोरोना से मौत की खबर सामने आई है। 57 वर्षीय सुनील बंसल आयुर्वेद लिमिटेड के डेयरी विभाग क उपाध्यक्ष थे। कंपनी ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि उसका बंसल के ऐलोपैथिक ट्रीटमेंट मेें कोई रोल नहीं था।
सुनील बंसल डेयरी विभाग के एक्सपर्ट थे
जानकारी के अनुसार सुनील बंसल डेयरी विभाग के एक्सपर्ट थे। उन्होंने जनवरी 2018 में पंतजलि का डेयरी विभाग जॉइन किया था। सुनील के कार्यकाल में ही पंतजलि ने डिब्बाबंद डेयरी प्रोडक्ट्स बेचने की घोषणा की थी। कंपनी ने जानकारी देते हुए बताया कि सुनील कोरोना वायरस से संक्रमित थे, जिसकी वजह से जयपुर स्थित राजस्थान हॉस्पिटल में उनकी 19 मई को मौत हो गई। आपको बता दें कि सुनील बंसल की पत्नी राजस्थान सरकार में सीनियर हेल्थ ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। आपको बता दें कि सुनील बंसल की कोरोना से मौत ऐसे समय हुई, जब बाबा रामदेव खुद इलाज की ऐलोपैथिक प्रणाली और कोरोना वायरस पर अपने बयान को लेकर काफी विवादों में हैं। यही वजह है कि सुनील की मौत को लेकर कंपनी ने बिल्कुल नपा तुला और सधा हुआ बयान दिया है। कंपनी ने कहा कि कंपनी की सुनील के ऐलोपैथिक इलाज में कोई भूमिका नहीं थी। खुद उनकी पत्नी उनके इलाज का जिम्मा संभाल रही थीं।
रामदेव ने एलोपैथी को लेकर दिया बयान वापस ले लिया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के हस्तक्षेप के बाद बाबा रामदेव ने एलोपैथी को लेकर दिया बयान वापस ले लिया। एलोपैथी चिकित्सा पद्धति को बेकार और तमाशा बताए जाने पर चिकित्सक संगठनों ने गहरी नाराजगी जाहिर की थी, जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने उनसे बयान वापस लेने का आग्रह किया था। स्वास्थ्य मंत्री ने बाबा रामदेव की सफाई को भी स्वीकार नहीं किया था। आखिरकार बाबा रामदेव ने रविवार को स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर बयान वापस लेने की बात कही। दरअसल, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बाबा रामदेव को पत्र लिखकर कहा था, "एलोपैथिक दवाओं व डॉक्टरों पर आपकी टिप्पणी से देशवासी बेहद आहत हैं। आपके वक्तव्य ने कोरोना योद्धाओं का निरादर किया। आपने कोरोना इलाज में एलोपैथी चिकित्सा को तमाशा, बेकार और दिवालिया बताना दुर्भाग्यपूर्ण है।