
नई दिल्ली। महंगाई, नोटबंदी और जीएसटी जैसे तमाम कदमों की वजह से सियासी आलोचना का सामना कर रही मोदी सरकार अब अपनी इमेज पीपुल्स फ्रेंडली बनाने में जुटी हुई है। सरकार केंद्रीयकृत जनशिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली
के इंटरनेट पोर्टल पर आने वाली शिकायतों को निपटाने में तेजी दिखा रही है। विभिन्न मंत्रालयों को मिली 12 लाख के करीब शिकायतों में से 83 फीसदी का निपटारा कर लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी मंत्रियों और अफसरों को खुद दिलचस्पी लेकर शिकायतों को निपटाने के लिए कहा गया है।
हफ्ते भर में एक्शन लेने का फरमान
सरकार की जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए कार्मिक, जनशक्ति व पेंशन मामलों के मंत्रालय ने शिकायतों पर हफ्ते भर में कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे शिकायतकर्ता से टेलीफोन पर शिकायत का स्टेटस भी पूछें। हर मंत्रालय में शिकायतों का निपटारा संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की देखरेख में होता है। हर महीने
रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को दी जाती है। अगर शिकायत निपटारे में लापरवाही साबित होगी तो सम्बंधित अधिकारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में खराब ग्रेंडिग दी जाएगी।
पांच गुना ज्यादा शिकायत
पिछले साल पब्लिक ग्रीवांस यानी पीजी पोर्टल पर 11 लाख 94 हजार से ज्यादा शिकायत विभिन्न मंत्रालयों के खिलाफ मिली। पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक शिकायतों में पहले की तुलना में करीब 500 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हो गया है। ज्यादातर शिकायत पेंशन, उपभोक्ता और ऑनलाइन शॉपिंग को लेकर हैं। राज्यों से भी पहल में शामिल होने की अपील कार्मिक, जनशक्ति व पेंशन मामलों के मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यों से भी केंद्रीय प्रणाली की तर्ज पर शिकायतों का निपटारा करने के लिए सिस्टम तैयार करने की अपील की है। उनका कहना है कि केंद्रीय स्तर पर ऐसा सिस्टम होने की वजह से केंद्र सरकार के मंत्रालयों का निपटारा तो हो जाता है। मगर राज्यों को भी सिस्टम से जुडऩे की जरूरत है।
Published on:
27 Oct 2017 09:25 pm
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