सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका, 'आधार नंबर से जोड़े जाएं सोशल मीडिया अकाउंट'

  • 'फेक अकाउंट पर रोक लगाने के लिए आधार से हो लिंक'
  • दावा- देश में 10 फीसदी फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट
  • सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल

नई दिल्ली। सोशल मीडिया ( social media ) साइट्स को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) में एक जनहित याचिका ( PIL ) दायर हुई है। जिसमें फेसबुक ( Facebook ), ट्विटर ( Twitter ) और न्यूज पोर्टलों को आधार नंबर ( aadhaar ) से जोड़ने की अपील की गई है। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट केंद्र सरकार को इस तरह का आदेश जारी करे जिससे कि फेक न्यूज पर काबू पाया जा सके।

NIA का खुलासा, पकड़े गए IS के संदिग्धों के घर मिली जाकिर नाइक की CD और किताब

'38 करोड़ सोशल अकाउंट में 10 फीसदी फर्जी'

दिल्ली बीजेपी के नेता और वकील अश्वनी उपाध्याय ने दावा किया कि इस वक्त देश में 3.5 करोड़ ट्विटर हैंडल और 32.5 करोड़ फेसबुक खाते एक्टिव हैं। वहीं सोशल मीडिया विशेषज्ञों के मुताबिक इनमें सभी प्लेटफॉर्म में 10 प्रतिशत खाते फर्जी हैं। याचिका में यह भी दावा किया गया कि फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से देश की शांति और सौहार्द को खतरा रहता है। इसके अलावा दंगों और सांप्रदायिक हिंसा के लिए भी जिम्मेदार हैं।

सनी देओल ने प्रधानमंत्री से की मुलाकात, मोदी बोले- हिन्दुस्तान जिंदाबाद था, है, और रहेगा!

केंद्र को निर्देश जारी करे कोर्ट: याचिका

PIL में कहा गया है कि प्रतिष्ठित लोगों और उच्च पदस्थ लोगों के नाम पर सैकड़ों फर्जी ट्विटर हैंडल और फर्जी फेसबुक अकाउंट हैं। ये फर्जी ट्विटर हैंडल और फर्जी फेसबुक अकाउंट संवैधानिक अधिकारियों की वास्तविक तस्वीरों का उपयोग करते हैं। इसलिए, आम आदमी उनपर प्रसारित होने वाले संदेशों पर विश्वास करता है। सके साथ ही राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने प्रचार के लिए इन फर्जी ट्विटर हैंडलों और फर्जी फेसबुक अकाउंट्स का उपयोग ना करें। याचिका में यह कहा गया है कि अदालत को सोशल मीडिया के फर्जी अकाउंट्स को बंद करने के लिए केंद्र सरकार को उचित कदम उठाने का निर्देश दे।

Show More
Chandra Prakash Content Writing
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned