
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में इस साल दशहरे पर प्लास्टिक का रावण आकर्षण का केंद्र रहा। पहली बार यहां प्लास्टिक कचरों से बने रावण के पुतले को एक भट्ठी में दहन किया गया। ऐसा करने का मकदस ये था कि प्लास्टिक की राख का उपयोग सीमेंट बनाने में किया जा सकता है।
प्लास्टिक वाले रावण का दहन करने का क्या था मकसद?
इस रावण का दहन पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद विजय गोयल (Vijay Goel) ने किया। गोयल ने दिल्ली वासियों को संदेश दिया कि प्लास्टिक की बुराई समाप्ति होनी चाहिए। 35 फुट ऊंचे रावण के पुतले को अन्य पुतलों के बीच खड़ा किया गया, जिस तरह दशहरा त्योहार के मौके पर पारंपरिक रूप से रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण के पुतलों को खड़ा किया जाता है। इस चौथे पुतले को गोली मारी गई और जलने के बाद इसकी राख का निस्तारण यांत्रिक तरीके से किया गया।
इस पहल से प्लास्टिक का हो सकता है सदुपयोग
यह अनोखी पहल सीमेंट मैन्युफ्रैक्चर्स एसोसिएशन (सीएमए) की ओर से केंद्रीय आवास एवं नगर विकास मंत्रालय की साझेदारी में की गई। इस मौके पर एक सीमेंट कंपनी के मालिक ने कहा, "यदि सही तरीके से उपयोग किया जाए तो प्लास्टिक कोयले की जगह ले लेगा। जब आप प्लास्टिक को जलाते हैं तो उससे अशुद्ध गैसें उत्सर्जित होती हैं। जब इसे 1,400 डग्री सेल्सियस तापमान पर जलाया जाता है तो इसमें मौजूद हाइड्रोकार्बन पूरी तरह जल जाती है, जिससे यह पर्यावरण-अनुकूल बन जाता है।"
उन्होंने कहा, "हम यह सामाजिक संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं कि कचरे का यदि सही तरीके से निपटान किया जाए तो वह प्रदूषण नहीं फैलाएगा।"
Updated on:
09 Oct 2019 11:30 am
Published on:
09 Oct 2019 11:23 am
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