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कलयुग में द्वापर का नजारा, उत्तराखंड की इस महिला के हैं पांच पति

अगर एक पत्नी के पांच-पांच पति हों तो फिर वह किसके साथ सात जन्मों का वादा करेगी। उत्तराखंड में एक ऐसी महिला है जिसके एक या दो नहीं कुल पांच पति हैं।

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Rajo uttrakhand

नई दिल्ली। शादी एक ऐसा पवित्र बंधन माना जाता है जिससे बंधने के बाद पति-पत्नी सात जन्मों के लिए एक दूसरे के हो जाते हैं। लेकिन अगर एक पत्नी के पांच-पांच पति हों तो फिर वह किसके साथ सात जन्मों का वादा करेगी। जी हां, सदियों बाद भी देश के कुछ हिस्सों में बहुपति प्रथा कायम है। आज उत्तराखंड की एक ऐसी ही महिला से आपको रुबरु करवाते हैं, जिसके एक या दो नहीं कुल पांच पति हैं और सभी भाई हैं।।

सभी पतियों एक समान संबंध
देहरादून के एक गांव में राजो अपने पांच पतियों के साथ रहती है। 21 साल की राजो से उसका पूरा परिवार खुश है। राजो हर रात अलग-अलग पति के साथ रहती है क्योंकि वो सभीको समान प्यार करती है और उन्हें समय देती है। राजो के मुताबिक उसके परिवार में कभी लड़ाई-झगड़ा नहीं होता। सभी प्यार से रहते हैं। राजो का अपने सभी पतियों के साथ शारीरिक संबंध है। परिवार चलाने में सभी पति समान रुप से अपनी भागीदारी निभाते हैं। परिवार के भौतिक सुविधाओं का ख्याल भी सभी मिलजुलकर रखते हैं।

पांच पति लेकिन बच्चे के जैविक पिता की जानकारी नहीं
राजो का एक 18 महीने का बच्चा है. लेकिन उसका जैविक पिता कौन है इसकी जानकारी नहीं है। पिता की जानकारी नहीं होने पर भी राजो खुश है। उसकी पहली शादी गुड्डू से हुई थी। उसके कुछ ही साल बाद उनसे चार अन्य पुरुषों से भी शादी कर ली। राजो के सभी पति की उम्र 18 से 34 साल के बीच में है।

18 साल की उम्र तक हो चुकी थी 5 शादी
राजो की पहली शादी हिंदू परंपरा से पहले पति गुड्डू से करीब सात साल पहले हुई थी। इसके बाद उसने 32 साल के बैजू, फिर 28 साल के संतराम, 26 साल के गोपाल और आखिरी शादी 19 साल के दिनेश से हुई। दिनेश से जब राजो की शादी हुई तबतक वह 18 साल की हो चुकी थी।

मां ने भी की थी 3 शादी
राजो कहती है कि उसे कभी इस परंपरा से परेशानी नहीं हुई। उसे बचपन में ही पता चल गया था कि उसे कई पतियों के स्वीकार करना होगा, क्योंकि उसकी मां ने भी तीन पुरुषों से शादी की थी।


विवाहित जीवन में टोपी का अहम योगदान
राजो के विवाहित जीवन में एक टोपी का अहम योगदान है। राजो जिस वक्त एक पति के साथ होती है, उसके बाकी पति उस कमरे में नहीं जाते। मान लीजिए राजो, गोपाल के साथ कमरे में है। तो कमरे के बाहर गोपाल अपनी टोपी रख देगा। जिससे उसके बाकी पति मर्यादा का ख्याल रखते हुए उस कमरे में नहीं जाते हैं।


महाभारत काल से प्रेरित
बताया जाता है कि इलाके में बहुपति की अजीब परंपरा का संबंध महाभारत काल से प्रेरित है। द्रोपति का विवाह भी पांच पांडवों से हुआ था। हिमालय और तिब्बत के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक ही परिवार के भाईयों से शादी करती हैं।


हिमालय क्षेत्र में बहुपति प्रथा
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरी भारत के हिमाचल प्रदेश, कन्नौर में और तिब्बत में बहुपति प्रथा आज भी चल रही है। इस प्रथा का दूसरा पहलू यह भी है कि जिस रफ्तार से महिलाओं की संख्या कम हो रही है एकदिन यह मजबूरी बन जाएगी।







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