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अब नहीं सुन सकेंगे मन की बात! प्रसार भारती ने की ऑल इंडिया रेडियो को बंद करने की घोषणा

प्रसार भारती ने अपने अखिल भारतीय राष्ट्रीय रेडियो चैनल यानी ऑल इंडिया रेडियो को तत्काल प्रभाव से बंद करने की घोषणा की है। इसके साथ ही पांच शहरों में मौजूद इसके क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र भी बंद किए जाएंगे।

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ऑल इंडिया रेडियो

एआईआर

नई दिल्ली। प्रसार भारती ने अपने अखिल भारतीय राष्ट्रीय रेडियो चैनल यानी ऑल इंडिया रेडियो को तत्काल प्रभाव से बंद करने की घोषणा की है। इसके साथ ही पांच शहरों में मौजूद इसके क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र भी बंद किए जाएंगे। प्रसार भारती ने यह कदम खर्चों में कटौती के चलते उठाया है।

प्रसार भारती ने बृहस्पतिवार को एआईआर के राष्ट्रीय चैनल समेत अहमदाबाद, हैदराबाद, लखनऊ, शिलॉन्ग और तिरुवनंतपुरम स्थित रीजनल एकेडमीज ऑफ ब्रॉडकास्टिंग एंड मल्टीमीडिया (आरएबीएम) को बंद करने के फैसले की घोषणा की।

बीते 24 दिसंबर 2018 को प्रसार भारती ने इन्हें बंद किए जाने का पत्र आकाशवाणी महानिदेशकको भेजा था और 3 जनवरी को यह फैसला लागू कर दिया गया।

बहुभाषी ऑल इंडिया रेडियो की लॉन्चिंग 1988 में हुई थी। इसे हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू भाषा में लॉन्च किया गया था। इसका प्रसारण शाम 6.50 से लेकर सुबह 6.50 बजे तक होता था। इस दौरान रेडियो पर समाचार, समूह चर्चा, राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम समेत भारतीय समाज से जुड़े कई कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे। इस फैसले के बाद अब एआईआर के पास कोई राष्ट्रीय चैनल नहीं रहेगा।

वहीं, प्रसार भारती के इस कदम का विरोध भी हुआ है। एआईआर और दूरदर्शन के प्रोग्राम स्टाफ एसोसिएशन ने इसका विरोध किया है। इनका कहना है कि इस फैसले के खिलाफ प्रसार भारती को पत्र लिखकर वापस लेने की अपील की जाएगी। खर्चों में कटौती के इससे बेहतर विकल्प भी तलाशे जा सकते हैं।

मीडिया से बातचीत में 18 मई 1988 को एआईआर पर पहली उद्घोषणा करने वाली हिंदी प्रस्तोता रजनी एसके दत्ता कहती हैं, "इसे मुख्यता छात्रों और रात की पाली में काम करने वालों के लिए पेश किया गया था।"

वहीं, 1980 के दशक के अंत से एआईआर में अंग्रेजी प्रस्तोता ककोली बनर्जी को अक्सर रात में रेडियो सुनने वाले इंजीनियरिंग छात्रों और एमबीए करने की तैयारी करने वालों के पत्र मिलते रहते हैं। वह कहती हैं, "उस वक्त सभी चैनल् रात में प्रसारण बंद कर देते थे। हमारे पास जो लोग रात में जागना चाहते थे, उनके लिए तमाम तरह के कार्यक्रम होते थे।"