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राष्ट्रपति ने पाक को दिया संदेश, गोलियों के बीच नहीं हो सकती वार्ता

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया, उन्होंने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की अग्रिम बधाई दी

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Vikas Gupta

Jan 26, 2016

 Pranab Mukherjee addressed nation

Pranab Mukherjee addressed nation

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश के 67 वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया। उन्होंने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की अग्रिम बधाई दी। उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्र के 66वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मैं भारत और विदेशों में बसे आप सभी भारतीय को हार्दिक बधाई देता हूं। मैं, हमारी सशस्त्र सेनाओं, अर्ध-सैनिक बलों तथा आंतरिक सुरक्षा बल के सदस्यों को अपनी विशेष बधाई देता हूं। मैं उन वीर सैनिकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जिन्होंने भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने और विधि शासन को कायम रखने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।

उन्होंने कहा कि देश हर बात से कभी सहमत नहीं होगा लेकिन वर्तमान चुनौती अस्तित्व से जुड़ी है। आतंकवादी महत्तवपूर्ण स्थायित्व की बुनियाद, मान्यता प्राप्त सीमाओं को नकारते हुए व्यवस्था को कमजोर करना चाहते हैं। अगर अपराधी सीमाओं को तोडऩे में सफल हो जाते हैं तो हम अराजकता के युग की ओर बढ़ जाएंगे। देशों के बीच विवाद हो सकते हैं और जैसा कि सभी जानते हैं कि जितना हम पड़ोसी के निकट होंगे, विवाद की संभावना उतनी अधिक होगी। असहमति दूर करने का एक सभ्य तरीका, संवाद है, जो सही प्रकार से कायम रहना चाहिए। लेकिन हम गोलियों की बौछार के बीच शांति पर चर्चा नहीं कर सकते।

भयानक खतरे के दौरान हमें अपने उपमहाद्वीप में विश्व के लिए एक पथप्रदर्शक बनने का ऐतिहासिक अवसर प्राप्त हुआ है। हमें अपने पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण वार्ता के द्वारा अपनी भावनात्मक और भू-राजनीतिक धरोहर के जटिल मुद्दों को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए और यह जानते हुए एक दूसरे की समृद्धि में विश्वास जताना चाहिए कि मानव की सर्वोत्तम परिभाषा दुर्भावनाओं से नहीं बल्कि सद्भावना से दी जाती है। मैत्री की बेहद जरूरत वाले विश्व के लिए हमारा उदाहरण अपने आप एक संदेश का कार्य कर सकता है।

राष्ट्र के नाम संबोधन में वर्ष 2015 को चुनौतिपूर्ण बताते हुए कहा कि बीते साल पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में रही और बाजारों पर असमंजस के बादल छाए रहे। ऐसे कठिन माहौल में किसी भी राष्ट्र के लिए तरक्की करना सरल नहीं होता, लेकिन चालू वित्त वर्ष में 7.3 प्रतिशत की अनुमानित विकास दर के साथ भारत तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था बनने के मुकाम पर है। मंदी के दौरान भी भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवोन्मेषण और स्टार्टअप के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है, जिसकी आर्थिक सफलता विश्व के लिए एक कौतूहल है।

उन्होने कहा कि विकास को गति देने के लिए सुधारों और प्रगतिशील कानूनों की जरूरत है तथा यह सुनिश्चित करना विधि निर्माताओं (सांसदों) का परम कर्तव्य है कि पूरे विचार-विमर्श और परिचर्चा के बाद ऐसे कानून लागू किए जाएं। निर्णय लेने का तरीका सामंजस्य, सहयोग और सर्वसम्मति बनाने की भावना होना चाहिये। निर्णय के कार्यान्वयन में देरी होने से विकास को नुकसान होगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था के भी कठिनाइयों का सामना करने का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि अनिश्चितता की वजह से निवेशकों ने भारत समेत उभरते बाजारों से निकासी की जिससे रुपये पर दबाव बना है। निर्यात प्रभावित होने के साथ ही विनिर्माण गतिविधियां अभी भी पूरी तरह से पटरी पर नहीं लौटी हैं।

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने देश में असहिष्णुता और ङ्क्षहसा फैलाने वाले अविवेकी तत्वों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने की आवश्यकता जताई है। मुखर्जी ने कहा कि राष्ट्रीयता के स्थापित आदर्शों पर चोट करने वालों से तत्काल बचाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि अतीत के प्रति सम्मान राष्ट्रीयता का एक आवश्यक पहलू है। हमारी उत्कृष्ट विरासत, लोकतंत्र की संस्थाएं सभी नागरिकों के लिए न्याय, समानता तथा लैंगिक और आर्थिक समता सुनिश्चित करती हैं। जब ङ्क्षहसा की घृणित घटनाएं इन स्थापित आदर्शों पर कुठाराघात करती हैं, तो उन पर तत्काल ध्यान देना चाहिए। हमें ङ्क्षहसा, असहिष्णुता और अविवेकपूर्ण ताकतों से स्वयं की रक्षा करनी होगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि हरेक भारतीय को एक स्वस्थ, खुशहाल और कामयाब जीवन जीने का अधिकार है, लेकिन इन अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।

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