उन्होंने कहा कि देश हर बात से कभी सहमत नहीं होगा लेकिन वर्तमान चुनौती अस्तित्व से जुड़ी है। आतंकवादी महत्तवपूर्ण स्थायित्व की बुनियाद, मान्यता प्राप्त सीमाओं को नकारते हुए व्यवस्था को कमजोर करना चाहते हैं। अगर अपराधी सीमाओं को तोडऩे में सफल हो जाते हैं तो हम अराजकता के युग की ओर बढ़ जाएंगे। देशों के बीच विवाद हो सकते हैं और जैसा कि सभी जानते हैं कि जितना हम पड़ोसी के निकट होंगे, विवाद की संभावना उतनी अधिक होगी। असहमति दूर करने का एक सभ्य तरीका, संवाद है, जो सही प्रकार से कायम रहना चाहिए। लेकिन हम गोलियों की बौछार के बीच शांति पर चर्चा नहीं कर सकते।