
पुणे: पुणे विश्वविद्यालय एक अजीबो गरीब फरमान जारी कर चर्चा में आ गया है। आमतौर पर पढ़ने में तेज और बेहतरीन प्रदर्शन के बल पर छात्र गोल्ड मेडल हासिल करते हैं लेकिन पुणे विश्वविद्यालय के नियम कुछ हटकर है। शुक्रवार को सावित्री बाई फुले विश्वविद्यालय ने अजीबो गरीब आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक मांस खाने वाले छात्रों को विश्वविद्यालय में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद गोल्ड मेडल नहीं दिया जाएगा।
साल 2014 में महाराष्ट्र सरकार ने पुणे विश्वविद्यालय का नाम बदलकर सावित्री बाई फुले विश्वविद्यालय कर दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्यागमूर्ति श्रीमती सरस्वती रामचंद्र शेलार स्वर्णपदक देने की घोषणा की। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर इस संबंध में एक सर्कुलर जारी किया गया है। जिसमें गोल्ड मेडल पाने के लिए जो शर्तें दी गई हैं उसके मुताबिक मेडल केवल शाकाहारी और शराब ना पीने वाले छात्र ही पा सकते हैं।
इस सर्कुलर में मेडल के लिए आवश्यक योग्यता में लिखा है कि आवेदक को दसवीं, बारहवीं और स्नातक की पढ़ाई में प्रथम या दूसरी श्रेणी से पास होना जरुरी है। योग्यता संख्या तीन के मुताबिक अप्लाई करने वाले छात्र को भारतीय सभ्यता-संस्कृति में भी रुचि होनी चाहिए। योग्यता चार में लिखा है कि योग और प्राणायाम करने वाले छात्र अगर अप्लाई करते हैं तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा सबसे ज्यादा चर्चा में नियम संख्या सात है। जिसमें कहा गया है कि छात्र का केवल शाकाहारी और नशा नहीं करने वाले छात्र ही इस गोल्ड मेडल के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
पुणे विश्वविद्यालय की गिनती देश के नामी-गिरामी शिक्षण संस्थानों में होती है। इसकी स्थापना 1949 में हुई थी।
वहीं दूसरी ओर दिल्ली के जेएनयू विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक छात्र में बिरयानी खाने पर जुर्माना लगाने की वजह से चर्चा में है। दरअसल एमए में पढ़ने वाले मोहम्मद आमिर मलिक ने विश्वविद्यालय में ही बिरयानी बनाकर अपने दोस्तों को खिलाया था। जेएनयू परिसर में बिरयानी खाने का दोषी पाये जाने पर उसपर 6 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया गया।
Updated on:
11 Nov 2017 12:21 pm
Published on:
11 Nov 2017 10:10 am
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