
मीडिया से बातचीत करते वीर सावरकर के पोते रंजीत।
मुंबई। वीर सावरकर पर कांग्रेस के सेवा दल द्वारा जारी पुस्तिका पर शुक्रवार को ताजा विवाद पैदा हो गया है। पुस्तिका में कथित रूप से क्रांतिकारी विनायक दामोदर 'वीर' सावरकर और महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे से संबंधित कुछ अपमानजनक टिप्पणी की गई है। इसे लेकर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने कहा है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चाहिए कि वह विवादास्पद संदर्भों को प्रकाशित करने के लिए कांग्रेस पार्टी, उसके पूर्व प्रमुख राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कराएं, जबकि मध्य प्रदेश सरकार को किताब पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
'वीर सावरकर कितने वीर' और 'आरएसएस और भाजपा कुछ तथ्य और जानकारी' सेवा दल की पुस्तकें हैं, जो 10 दिनों के सेवा दल के भोपाल में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में बांटी जा रही हैं। अन्य बातों के अलावा, इनमें से एक किताब में दावा किया गया है कि गोडसे और पूर्व में हिंदू महासभा के प्रमुख रहे सावरकर के बीच शारीरिक संबंध थे।
डोमिनिक लीपियर और लैरी कॉलिन्स की पुस्तक, 'फ्रीडम एट मिडनाइट' से एक अंश लेकर पुस्तिका में कहा गया है, "नाथूराम गोडसे के ब्रह्मचारी बनने से पहले सिर्फ एक बार उसके शारीरिक संबंधों का जिक्र मिलता है। ब्रह्मचारी बनने से पहले उसके अपने राजनीतिक गुरु वीर सावरकर के साथ समलैंगिक संबंध थे।"
वीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के अध्यक्ष रंजीत सावरकर ने कहा, "राजनीतिक लाभ के लिए कांग्रेस वीर सावरकर और उनकी विरासत पर बार बार हमले करती आई है। लेकिन, हमें उम्मीद नहीं थी कि वे इतने नीचे गिर जाएंगे।"
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि मानहानि, आपराधिक साजिश और भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत कांग्रेस के नेताओं पर मामला चलना चाहिए। साथ ही पुस्तिका पर प्रतिबंध लगना चाहिए। रंजीत सावरकर ने कहा कि 'फ्रीडम एट मिडनाइट' से इस बात को प्रकाशकों द्वारा बहुत पहले ही वापस ले लिया गया था।
Updated on:
04 Jan 2020 11:28 am
Published on:
03 Jan 2020 08:45 pm
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