
Rafale
नई दिल्ली। भारत और फ्रांस ने 36 राफेल लडाकू विमानों के सौदे के लिए भले ही अंतर सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, लेकिन इनकी कीमतों को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई है। इसमें एक से डेढ़ महीने का समय और लग सकता है। रक्षा मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बुधवार को बताया कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की हाल की भारत यात्रा के दौरान जिस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए उसमें कीमत को छोड़कर अन्य सभी पहलुओं पर बात रखी गई है और इस सौदे का यह महत्वपूर्ण पड़ाव है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, मैं कोई रकम नहीं बताऊंगा लेकिन मैं यह कह सकता हूं कि वे (फ्रांस) 126 विमानों के सौदे के समय की निविदा से नीचे आ गए हैं। अब फ्रांस के अधिकारी अंतर सरकारी समझौते के तहत नए सिरे से कीमत के बारे में विचार विमर्श करेंगे। भारत यह कोशिश कर रहा है कि फ्रांसीसी कंपनी पहले के समझौते से कम कीमत पर विमान देने को तैयार हो। गत अप्रेल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ओलांद की मुलाकता के दौरान 36 राफेल विमान की खरीद पर सहमति बनने के बाद 126 विमान खरीदने का सौदा अपने आप ठंडे बस्ते में चला गया था।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राफेल विमान सौदा 60 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, लेकिन रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने इसे अटकलबाजी करार देते हुए इसे खारिज कर दिया है। सूत्रों ने कहा कि संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है कि राफेल विमानों की आपूर्ति 126 विमानों के सौदे से बेहतर और अच्छी शर्तों पर होगी।
Published on:
27 Jan 2016 08:54 pm

बड़ी खबरें
View Allविविध भारत
ट्रेंडिंग
